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राजस्थान: अम्बेडकर जयंती संगोष्ठी में सामाजिक न्याय व समानता पर दिया गया जोर
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संक्षेप
राजस्थान: नागौर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक नरेश चन्द बारोठिया ने कहा कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर केवल भारतीय संविधान के निर्माता ही नहीं थे, बल्कि वे सामाजिक न्याय, समानता एवं मानवाधिकारों के महान प्रहरी भी थे।
विस्तार
राजस्थान: नागौर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक नरेश चन्द बारोठिया ने कहा कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर केवल भारतीय संविधान के निर्माता ही नहीं थे, बल्कि वे सामाजिक न्याय, समानता एवं मानवाधिकारों के महान प्रहरी भी थे। वे अम्बेडकर जयन्ती के उपलक्ष्य में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने समाज के वंचित एवं पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उनके विचार आज भी समाज को सही दिशा देने का कार्य कर रहे हैं। सामाजिक न्याय एवं समरसता विषय पर यह संगोष्ठी राजकीय महाविद्यालय स्तरीय कन्या छात्रावास में आयोजित की गई। इस अवसर पर बी.आर. मिर्धा महाविद्यालय के प्रोफेसर लाखाराम ने कहा कि शिक्षा ही वह सबसे सशक्त माध्यम है, जिसके द्वारा समाज में समानता स्थापित की जा सकती है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे डॉ. अम्बेडकर के संदेश “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” को अपने जीवन में अपनाएं।राजकीय विधि महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. हर्ष ने बाबा साहेब के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए उनके सामाजिक सुधारों, संविधान निर्माण में उनकी भूमिका तथा आधुनिक भारत के निर्माण में उनके योगदान को विस्तार से प्रस्तुत किया। राजकीय माडी बाई महाविद्यालय की प्रोफेसर हिमानी पारीक ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर का योगदान केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके विचार वैश्विक स्तर पर भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने काव्यात्मक शैली में ‘रश्मिरथी’ की पंक्तियों का संदर्भ देते हुए बाबा साहेब के संघर्षपूर्ण जीवन को प्रेरणादायक बताया। सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के संयुक्त निदेशक कुम्माराम ने कहा कि बाबा साहेब ने भारतीय समाज को नई दिशा दी और सामाजिक विषमताओं के विरुद्ध आजीवन संघर्ष करते हुए संविधान के माध्यम से सभी नागरिकों को समान अधिकार दिलाए। इस दौरान प्रोफेसर सुरेन्द्र सिंह ने बाबा साहेब के जीवन को संघर्ष, समर्पण एवं दृढ़ संकल्प का अनुपम उदाहरण बताया। संगोष्ठी में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के धर्मेन्द्र सिंह राठौड़, ओम प्रकाश रैवाड़, महावीर सिंह, इदरीस खान, नितेश सैन, सुरेन्द्र पाल, चन्द्र प्रकाश नैन, निर्मला चौधरी, सुभिता कुमारी, निर्मला कुमारी, दिनेश राजावत, जयप्रकाश जाखड़ सहित छात्रावास की अनेक छात्राओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
