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राजस्थान: “टेक्नोलॉजी विद ह्यूमैनिटी से ही संभव सतत विकास” वासुदेव देवनानी

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राजस्थान  Published by: Manoj Kumar Chordiya , राजस्थान  Edited By: Kunal, Date: 25/04/2026 10:27:52 am Share:
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संक्षेप

राजस्थान: राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि प्राचीन भारतीय अवधारणा में तकनीकी का उद्‌देश्य शक्ति प्रदर्शन न होकर हमेशा मानवहित रहा है। हमें टेक्नोलॉजी विद ह्यूमैनिटी की सोच के साथ आगे

विस्तार

राजस्थान: राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि प्राचीन भारतीय अवधारणा में तकनीकी का उद्‌देश्य शक्ति प्रदर्शन न होकर हमेशा मानवहित रहा है। हमें टेक्नोलॉजी विद ह्यूमैनिटी की सोच के साथ आगे बढ़ना होगा तभी हम एक स्थाई विकास का मॉडल स्थापित कर पाएंगे। श्री देवनानी ने शुक्रवार को पैसिफिक विश्ववि‌द्यालय के कॉमर्स एंड मैनेजमेंट विभाग की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस के उद्‌द्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए यह बात कही। कॉन्फ्रेंस का विषय था रिडिपाइन बिजनेस पैराडाइम  थ्रू एनवायरमेंटल सोशल एंड गवर्नेस एंड एआई सस्टेनेबिलिटी एंड इंक्लूसिविटी। विधान सभा अध्यक्ष श्री देवनानी ने उद्‌घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि विकास, पर्यावरण एवं सामाजिक चुनौतियाँ पर सामूहिक रूप से विचार करने की आवश्यकता है। सतत एवं टिकाऊ विकास के लिए यह अत्यत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्राधीन भारत के जान, विज्ञान और तकनीक का मानव चेतना के साथ सहयोगी एवं पूरक संबंध रहा है। भारतीय वाङ्मय में वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा सदियों से चली आ रही है। हमारा व्यावसायिक दृष्टिकोण ऐसा हो जो विश्व परिवार को आधार बनाकन प्रकृति एवं मानवता के लिए सहयोगी के रूप में सामने आए।


स्पीकर श्री देवनानी ने कहा कि आज के समय में व्यवसाय सिर्फ अर्थ कमाने की इकाई नहीं बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व भी है। काप्रैस के विषय कर उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरण संतुलन, सामाजिक समावेशन एवं पारदशी गवर्नेन्स के माध्यम से प्रधानमंत्री के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होने शिक्षकी, शोधकर्ताओं एवं नवाधारकर्ताओं को एक साथ आगे आकर राष्ट्र के भविष्य के निर्माण की व्यवस्था में सहयोग करने का आहवान किया। उन्होंने कहा कि हम पाठ्यक्रम तक ही सीमित ना रहे बल्कि शोध करे और उसके बारे में नई पीढ़ी को जागरूक करें। हमें हमारे व्यावसायिक मापदंडों को पुनर्परिभाषित करना होगा और इस आधार पर आगे का मार्ग प्रशस्त करना होगा। वर्तमान तकनीक भारतीय बौधिकता का आधुनिक स्वरूप- श्री देवनानी ने कहा कि मानव चेतना एवं तकनीक का बहुत गहरा संबंध है। प्राचीन भारतीय बौधिकता बहुत उच्च स्तर पर थी। उस वक्त बिना शब्दों से मन के माध्यम से संवाद करने की तकनीक विकसित कर ली गई थी। वर्तमान एआई तकनीक प्राचीन भारतीय बौद‌धिकता का आधुनिक स्वरूप है।

पैसिफिक विश्ववि‌द्यालय के निदेशक प्रोफेसर बीपी शर्मा ने उद्‌घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि हमे अपने उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग करते हुए एक स्थाई विकास को प्राप्त करना होगा। विशिष्ट अतिपि यूसीसीआई के अध्यक्ष मनीष गलुण्डिया ने वर्तमान समय की व्यावसायिक चुनौतियों के बारे में जानकारी दी। पैसिफिक विश्ववि‌द्यालय के कुलपति प्रो हेमंत कोठारी ने विश्ववि‌द्यालय की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। कॉन्फ्रेस अध्यक्ष डॉ दीपेन माथुर ने इस अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेस की विषय वस्तु के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर अतिथियों ने स्मारिका का विमोचन किया।

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