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उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के 61 हजार गांवों तक पहुंचेगी बैंकिंग सुविधा, RBI के निर्देश पर तेज हुई कार्रवाई

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उत्तर प्रदेश  Published by: Anand Kumar(UP) , Date: 30/03/2026 11:18:01 am Share:
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के 61000 से अधिक गांव और कस्बे आज भी बैंकिंग सुविधाओं से वंचित हैं. इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सभी बैंकों को ऐसे केंद्रों की सूची भेज कर जल्द सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं.

विस्तार

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के 61000 से अधिक गांव और कस्बे आज भी बैंकिंग सुविधाओं से वंचित हैं. इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सभी बैंकों को ऐसे केंद्रों की सूची भेज कर जल्द सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं. आरबीआई के अनुसार, राज्य में कुल 62404 बैंकिंग- विहीन केंद्र चिन्हित किए गए थे, जिनमें से अधिकांश अब भी सेवाओं से दूर हैं. इनमें 61949 केंद्र टियर- 6 श्रेणी के हैं, जहां आबादी 5000 से कम है. इन इलाकों में बैंक शाखा खोलना भौगोलिक, आर्थिक और आधारभूत कारणों से चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है. निर्देशों के बाद बैंकों ने इन क्षेत्रों में माइक्रो लेवल सर्वे शुरू कर दिया है. प्राथमिकता उन गांव- कस्बों को दी जा रही है, जहां आबादी 4 से 5000 के बीच है. पहले चरण में ऐसे 641 केंद्र चिन्हित किए गए थे. इनमें से 618 तक बैंकिंग सेवाएं विभिन्न माध्यमों से पहुंच चुकी हैं. शेष 23 केंद्रों में अभी भी सेवाएं शुरू नहीं हो सकीं है. इसका कारण दुर्गम वन क्षेत्र या बाढ़ प्रभावित इलाके हैं. बैंकों को पारंपरिक शाखाएं खोलने के बजाय बैंकिंग आउटलेट, बैंक मित्र और डिजिटल माध्यमों के जरिए सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। 

 इससे लागत कम होगी और दूर दराज क्षेत्रों तक पहुंच आसान बनेगी. राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के माध्यम से इन प्रयासों की लगातार समीक्षा की जा रही है. साथ ही बैंकों को प्रत्येक केंद्र की अपडेट रिपोर्ट तैयार कर आरबीआई को देने के निर्देश दिए गए हैं. जिला स्तर पर भी समन्वय बढ़ाया गया है, ताकि प्रशासनिक सहयोग से कार्य में तेजी लाई जा सके. बैंकिंग सेवाओं के विस्तार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचेगा . जनधन योजना, पेंशन, सब्सिडी और डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाएं इन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति देंगी. इस अभियान की निगरानी के लिए एक उप- समिति गठित की गई है, जिसकी नियमित बैठकें हो रही हैं। हाल ही में फरवरी में हुई बैठक में शेष केंद्रों पर तेजी से कार्यवाही के निर्देश दिए गए। 
 

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