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उत्तर प्रदेश: बस्ती में मशरूम उत्पादन पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण शुरू, 25 युवक-युवतियां ले रहे हिस्सा

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उत्तर प्रदेश  Published by: Irshad Ahmad , उत्तर प्रदेश  Edited By: Yashoda, Date: 05/10/2026 05:43:29 pm Share:
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  • Published by.: Irshad Ahmad ,
  • Edited By.: Yashoda,
  • Date:
  • 05/10/2026 05:43:29 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: बस्ती आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केंद्र बस्ती में सोमवार से मशरूम उत्पादन तकनीक पर पांच दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण शुरू हुआ।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: बस्ती आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केंद्र बस्ती में सोमवार से मशरूम उत्पादन तकनीक पर पांच दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण शुरू हुआ। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोन-III कानपुर से वित्त पोषित सरल परियोजना के तहत आयोजित प्रशिक्षण 5 से 9 अक्तूबर तक चलेगा। इसमें जनपद के विभिन्न ब्लॉकों से 25 युवक-युवतियां प्रतिभाग कर रहे हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. पीके मिश्रा ने की। उन्होंने कहा कि मशरूम उत्पादन कम लागत, कम स्थान और कम समय में आय का साधन बन सकता है। ग्रामीण युवाओं के लिए यह स्वरोजगार और उद्यमिता का बेहतर विकल्प है। उन्होंने धान-गेहूं के भूसे के उपयोग, उत्पादन इकाई स्थापित करने, तापमान और आर्द्रता के प्रबंधन तथा मशरूम उत्पादन के अवशेष से जैविक खाद तैयार करने की जानकारी दी।

 बटन मशरूम की उत्पादन तकनीक समझाई

प्रशिक्षण के कोर्स कोऑर्डिनेटर डॉ. प्रेम शंकर (पादप सुरक्षा) ने बटन मशरूम की उत्पादन तकनीक के विभिन्न चरणों की जानकारी दी। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण स्पॉन के चयन, भूसे के उपचार, बैग तैयार करने, स्पॉनिंग, इनक्यूबेशन तथा कीट एवं रोग प्रबंधन के बारे में प्रतिभागियों को विस्तार से बताया।

डॉ. वीबी सिंह (पादप प्रजनन) ने गुणवत्तापूर्ण स्पॉन की पहचान और मशरूम उत्पादन में उसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने उत्पादन के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली सामग्री के चयन को महत्वपूर्ण बताया।

 मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने की जानकारी

डॉ. अंजलि वर्मा (गृह विज्ञान) ने मशरूम के पोषक तत्वों के साथ ही उसके प्रसंस्करण और भंडारण की जानकारी दी। उन्होंने मशरूम से पाउडर, अचार और नमकीन जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार कर अतिरिक्त आय अर्जित करने की संभावनाओं के बारे में बताया। महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने पर भी उन्होंने विशेष जोर दिया।

 लागत-लाभ और मार्केटिंग पर प्रशिक्षण

आरवी सिंह (कृषि प्रसार) ने मशरूम उत्पादन को व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए लागत-लाभ, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग की जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन को केवल कृषि गतिविधि के बजाय व्यवसाय के रूप में विकसित करने के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया जा रहा है।

प्रशिक्षण में शामिल 25 युवक-युवतियों को मशरूम उत्पादन की तकनीकी जानकारी के साथ इसे स्वरोजगार के रूप में अपनाने के लिए आवश्यक व्यावहारिक एवं व्यावसायिक पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। कृषि विज्ञान केंद्र का यह प्रशिक्षण ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।


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