-
☰
उत्तर प्रदेश: बरकतें और इबादत से महके घर-मस्जिदें, नेकी के बदले कई गुना ज्यादा मिलता है सवाब
- Photo by : SOCIAL MEDIA
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: हमतों और बरकतों का पाक महीना रमजान उल- मुबारक शुरू होते ही सोनभद्र जिला सहित आसपास के इलाकों के मुस्लिम समुदायों में रूहानी माहौल देखने को मिल रहा है. रोजेदार पूरे समर्पण के साथ रोजा
विस्तार
उत्तर प्रदेश: हमतों और बरकतों का पाक महीना रमजान उल- मुबारक शुरू होते ही सोनभद्र जिला सहित आसपास के इलाकों के मुस्लिम समुदायों में रूहानी माहौल देखने को मिल रहा है. रोजेदार पूरे समर्पण के साथ रोजा रखकर इबादत में जुट गए हैं. इस पवित्र महीने में लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बदल जाती है - सुबह से रात तक इबादत, नमाज और नेक कामों में समय बिताया जाता है. रमजान का यह महीना विशेष रूप से महिलाओं के लिए दोहरी जिम्मेदारी लेकर आता है. वह न केवल पूरी शिद्दत के साथ इबादत और तिलावत में समय बिताती हैं, बल्कि घर परिवार की देखभाल और शहरी व इफ्तार की तैयारियों में भी सक्रिय रहती हैं. मस्जिदों में पांच वक्त की नमाज अदा की जा रही है, जहां बड़ी संख्या में लोग एकत्र होकर मुल्क में अमन- चैन और खुशहाली की दुआ मांग रहे हैं. रमजान के दौरान दिनचर्या अलसुबह करीब 3 बजे सहरी के साथ शुरू होती है. स हरी के बाद फजर की नमाज अदा की जाती है, जिसके बाद कुरआन की तिलावत, दरूद, तस्बीह और नफ़्ल नमाज़ पढ़ने का सिलसिला जारी रहता है। दिन भर के संयम के बाद शाम करीब 6 बजे के बाद (सूर्यास्त के अनुसार) रोजेदार इफ्तार के साथ अपना रोजा खोलते हैं. मुस्लिम समाज के धर्मगुरुओं ने बताया कि रोजा सिर्फ भूखे प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम और आत्मशुद्धि का वह माध्यम है जो इंसान को सही रास्ते पर चलना सिखाती है. उन्होंने बताया कि रोजा रखने के आध्यात्मिक लाभ के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टि से भी इसके सकारात्मक प्रभाव हैं. यह शरीर की शुद्ध करता है और कई शारीरिक विकारों को दूर करता है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि रमजान साल के 12 महीनों में सबसे पाक महीना है, जिसमे की गई नेकी का सवाब कई गुना बढ़ जाता है. असली रोजा वही है जो इंसान की आंख,कान, हाथ और जुबान को गुनाहों से बचाए और उसे एक बेहतर इंसान बनाए।