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उत्तर प्रदेश: काली माता मंदिर विवाद में जूना अखाड़े को झटका, महंत रामगिरी की महंताई और पूजा-पाठ में हस्तक्षेप पर रोक

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उत्तर प्रदेश  Published by: Sunil Kapoor , उत्तर प्रदेश  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 15/10/2026 05:11:32 pm Share:
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  • Edited By.: Kunal Tewatia,
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  • 15/10/2026 05:11:32 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: काली माता मंदिर बनाम पंचदशनाम जूना अखाड़ा के सिविल वाद संख्या 300/2026 में सिविल जज (सी.डि.) मुरादाबाद की अदालत ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किया है। 1

विस्तार

उत्तर प्रदेश: काली माता मंदिर बनाम पंचदशनाम जूना अखाड़ा के सिविल वाद संख्या 300/2026 में सिविल जज (सी.डि.) मुरादाबाद की अदालत ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किया है। 12 अक्टूबर को हुई सुनवाई का विवरण  12.10.2026 को पत्रावली पेश होने पर वादीगण व प्रतिवादी संख्या 3 व 4 के अधिवक्ता उपस्थित रहे, जबकि प्रतिवादी 1 व 2 पर तामीला पर्याप्त होने के बाद भी कोई उपस्थित नहीं हुआ। वादीगण महंत रामगिरी जी आदि की ओर से धारा 151 सीपीसी के तहत प्रार्थना पत्र 31 ग व शपथ पत्र 32 ग दाखिल कर कहा गया कि समन तामील के बाद भी प्रतिवादीगण जानबूझकर आपत्ति दाखिल नहीं कर रहे हैं और विलंब कर रहे हैं। नवरात्र 11.10.2026 से शुरू हो रहे हैं, इसलिए मंदिर में सुचारू पूजा-पाठन के लिए अस्थायी निषेधाज्ञा प्रार्थना पत्र 6 ग का शीघ्र निस्तारण जरूरी है।

वादी का आरोप है कि 08.04.2026 को प्रतिवादी संख्या 2 से 4 ने मंदिर परिसर में आकर धावा बोलने जैसा कृत्य किया और 08.04.2026 का एक पत्र दिखाकर कहा कि अब मंदिर की देखभाल प्रतिवादी 3 व 4 करेंगे, 10-15 दिन में बोरिया-बिस्तर समेट लो, जबकि उनका मंदिर से कोई कानूनी संबंध नहीं है। उधर प्रतिवादी 3 व 4 ने आदेश-07 नियम-11 सीपीसी के तहत प्रार्थना पत्र 26 ग व शपथ पत्र प्रस्तुत किए थे। अदालत का अंतिम आदेश  पत्रावली के अवलोकन में पाया गया कि प्रतिवादीगण को 01.10.2026 तक प्रतिवाद पत्र व प्रार्थना पत्र 6 ग पर आपत्ति के लिए अंतिम अवसर दिया गया था, लेकिन कोई प्रतिवाद पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया। मामले की तात्कालिकता (Urgency) और नवरात्र को देखते हुए प्रभगत मंदिर में पूजा-पाठन के कार्य को संरक्षित किया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है।

इसी आधार पर अदालत ने आदेश दिया कि प्रार्थना पत्र 6 ग के निस्तारण तक प्रतिवादीगण वादी संख्या-2 की महंताई, प्रख्यात मंदिर की व्यवस्था, क्रियाकलापों एवं उनके दायित्वों के निर्वहन में किसी प्रकार की कोई रुकावट, अवरोध या हस्तक्षेप न करें।इसके साथ ही प्रार्थना पत्र 31 ग को निस्तारित कर दिया गया। पत्रावली को वास्ते सुनवाई प्रार्थना पत्र 6 ग / 26 ग / आपत्ति / प्रतिवाद पत्र के लिए दिनांक 27.11.2026 को पेश होने के आदेश दिए गए।
 


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