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बिहार: महादलित व अल्पसंख्यक समाज के साथ अन्याय का दावा, आंदोलन की चेतावनी

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बिहार  Published by: Sanjay Kumar Verma , Date: 04/02/2026 03:17:29 pm Share:
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  • 04/02/2026 03:17:29 pm
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संक्षेप

बिहार: मुसहर भुईंया शिक्षा सेवक महासंघ के प्रदेश सचिव सह जिला अध्यक्ष मुकेश मांझी ने शिक्षा सेवकों को शिक्षक का दर्जा नहीं दिए जाने पर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सोमवार को आयोजित शिक्षा सेवक महासंघ की बैठक

विस्तार

बिहार: मुसहर भुईंया शिक्षा सेवक महासंघ के प्रदेश सचिव सह जिला अध्यक्ष मुकेश मांझी ने शिक्षा सेवकों को शिक्षक का दर्जा नहीं दिए जाने पर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सोमवार को आयोजित शिक्षा सेवक महासंघ की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार में वर्ष 2008-09 से अब तक 28 हजार से अधिक शिक्षा सेवक महादलित एवं अल्पसंख्यक टोले के विद्यालयों में निरंतर सेवा दे रहे हैं। ये शिक्षा सेवक प्रतिदिन सुबह 9:30 बजे से शाम 4 बजे तक शिक्षकों की तरह शैक्षणिक कार्य करते हैं और शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार गैर-शैक्षणिक कार्यों का भी समय पर निष्पादन कर रहे हैं।

मुकेश मांझी ने कहा कि जहां नियमित शिक्षकों को 50 हजार से लेकर लाखों रुपये तक वेतन, महंगाई भत्ता, चिकित्सा भत्ता सहित अन्य सुविधाएं मिलती हैं, वहीं शिक्षा सेवकों को मात्र 22 हजार रुपये मानदेय पर कार्य करना पड़ रहा है। किसी प्रकार का अतिरिक्त भत्ता नहीं मिलने से महंगाई के इस दौर में परिवार का भरण-पोषण करना बेहद कठिन हो गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार द्वारा स्मार्ट फोन खरीद के लिए भेजी गई राशि अब तक बकाया है। श्री मांझी ने सरकार पर महादलित और अल्पसंख्यक समाज के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि यदि सरकार का यही रवैया रहा तो शिक्षा सेवक सड़क से लेकर सदन तक उग्र आंदोलन।