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मध्य प्रदेश: मक्का की फसल चोरी कराने में पुलिस की मिलीभगत का लगा आरोप, एसपी से की गई शिकायत
- Photo by : social media
संक्षेप
मध्य प्रदेश: बैतूल जिले की प्रभात पट्टन तहसील के हिवरखेड़ गांव में करीब एक लाख रुपये की मक्का की फसल चोरी होने का मामला सामने आया है।
विस्तार
मध्य प्रदेश: बैतूल जिले की प्रभात पट्टन तहसील के हिवरखेड़ गांव में करीब एक लाख रुपये की मक्का की फसल चोरी होने का मामला सामने आया है। दो महिलाओं ने मासोद पुलिस चौकी प्रभारी दिनेश कुमरे और आरक्षक कमलेश डेहरिया पर आरोपियों से मिलीभगत कर फसल ले जाने में सहयोग करने का आरोप लगाया है। पीड़ित महिलाओं ने 27 अक्टूबर को पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दी और मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की। शिकायतकर्ता किसनीबाई (55), पत्नी लक्ष्मण नागले और लक्ष्मी नागले (33), पत्नी हेमंत हारोड़े, निवासी हिवरखेड़ के अनुसार, गांव में खसरा नंबर 150 की 0.809 हेक्टेयर कृषि भूमि उनके स्वामित्व और कब्जे में है। महिलाओं ने रमेश गव्हाड़े, उर्मिला गव्हाड़े, मीना गव्हाड़े और ऋषीकेश गव्हाड़े पर कथित फर्जी विक्रय पत्र के आधार पर जमीन पर कब्जा करने और खेत में लगी मक्का की फसल ले जाने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। महिलाओं का आरोप है कि 25 अक्टूबर को दोपहर करीब 12 बजे आरक्षक कमलेश डेहरिया और चौकी प्रभारी दिनेश कुमरे ने दस्तावेजों की जांच के लिए उन्हें मासोद चौकी बुलाया था। वहां पहुंचने पर रमेश और ऋषीकेश गव्हाड़े पहले से मौजूद थे। शिकायत के मुताबिक, दोनों महिलाओं को करीब ढाई घंटे तक चौकी में बैठाए रखा गया। इसी दौरान उन्हें सूचना मिली कि उनके खेत से मक्का की फसल निकाली जा रही है। महिलाओं के अनुसार, जब वे खेत पहुंचीं तो वहां दो ट्रैक्टर और एक जीप मौजूद थी। आरोप है कि मजदूरों की मदद से मक्का के भुट्टे वाहनों में भरे जा रहे थे। महिलाओं ने वाहनों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन वाहन फसल लेकर वहां से चले गए। शिकायतकर्ताओं ने इससे करीब एक लाख रुपये का नुकसान होने की बात कही है। पीड़ित महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद जब वे शिकायत दर्ज कराने मासोद चौकी पहुंचीं, तो उनकी शिकायत नहीं लिखी गई और उनके साथ डांट-फटकार की गई। इसके बाद उन्होंने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आवेदन देकर चौकी प्रभारी, आरक्षक और चार अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पुलिसकर्मियों का पक्ष सामने आना बाकी है। मामले में निष्पक्ष जांच के बाद ही घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
