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राजस्थान: महर्षि दयानंद सरस्वती की 202वीं जयंती पर वैदिक विधि से हुआ शुभारंभ

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राजस्थान  Published by: Pramod Kumar Bansal , Date: 13/02/2026 11:47:23 am Share:
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  • 13/02/2026 11:47:23 am
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संक्षेप

राजस्थान: आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती की 202 वीं जयंती पर  आर्य समाज कोटपूतली के प्रांगण में महाशय धर्मपाल गुलाटी एमडीएच नवनिर्मित यज्ञशाला का लोकार्पण समाजसेवी एवं भामाशाह पूरणमल भरगढ़ की अध्यक्षता ,  विशिष्ट अतिथि विधाय

विस्तार

राजस्थान: आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती की 202 वीं जयंती पर  आर्य समाज कोटपूतली के प्रांगण में महाशय धर्मपाल गुलाटी एमडीएच नवनिर्मित यज्ञशाला का लोकार्पण समाजसेवी एवं भामाशाह पूरणमल भरगढ़ की अध्यक्षता ,  विशिष्ट अतिथि विधायक हंसराज पटेल की  धर्मपत्नी राधा पटेल,स्वामी गणेशानंद महाराज, आचार्य राजकुमार शास्त्री  के कर कमलों से किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य राजकुमार शास्त्री के द्वारा नवनिर्मित यज्ञशाला के हवन कुंड में वैदिक मंत्रों से  आहूति प्रदान कर विधि विधान से कराया गया । यजमान  आर्य समाज के प्रधान डॉक्टर हरीश कुमार, श्रीकांत कुमावत, रोहिताश लंबरदार  सपत्नी यजमान रहे तथा उपस्थित महिला तथा पुरुषों ने आहुतियां प्रदान की। स्वामी गणेशानंद महाराज ने अपने उद्बोधन में बताया कि आर्य समाज श्रेष्ठ विचारों का प्रचार प्रसार करने वाला संगठन है आज सभी संगठनों में यदि कोई तर्कशील एवं प्रमाणित वेदों व शास्त्रों के सिद्धांतो की बात करता है वह आर्य समाज ही है ।  आजादी के समय स्वतंत्रता आंदोलन में जिन क्रांतिकारियों ने भाग लिया उनमे 80 प्रतिशत आर्य समाज से प्रेरित लोग ही थे। उन्होंने अपने उद्बोधन में बताया की हम सत्य सिद्धांतों का पालन स्वयं करते हुए ही दूसरों को बुराइयों से दूर कर धार्मिक कार्यों में लगा सकते हैं 

,पूर्व में हुए भेदभाव के कारण अपने लोग ही सनातन समाज से दूर हुए लेकिन महर्षि दयानंद ने आर्य समाज की स्थापना कर उन्हें अपने बराबर का स्थान दिया और समाज में बढ़ी हुई दूरियों को कम करने का कार्य ,आर्य समाज ने ही किया। कार्यक्रम अध्यक्ष समाजसेवी पूरणमल भरगढ़ ने बताया कि हमें अपने कुटुंब एवं परिवार को विघटन से बचाने की बहुत ही आवश्यकता है तथा शास्त्रों के ज्ञान को  आने वाली पीढ़ी को बताना होगा क्योंकि हम इस ज्ञान परंपरा को आगे नहीं बढ़ाएंगे तो आने वाली पीढ़ी अनभिज्ञ ही रहेगी।  उन्होंने बताया कि मेरी बहुत से व्यक्तियों से चर्चा होती है जिन्होंने हमारे धर्म शास्त्रों के  प्रथम पृष्ठ की फोटो भी नहीं देखी होती है और दुष्प्रचार कर सनातन संस्कृति को तोड़ने का षडयंत्र पूर्वक कार्य कर रहे हैं। आचार्य राजकुमार शास्त्री ने  बताया कि आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती की आज 202 वीं जयंती पर इस यज्ञशाला  का निर्माण बहुत ही पुनीत कार्य महाशय राजीव गुलाटी डारेक्टर एमडीएच  के द्वारा किया गया है महर्षि दयानंद का जन्म  उस कालखंड में हुआ जब हजारों मत पंथ संप्रदाय फैले हुए थे । उनके बीच  वेदों की पुनर्स्थापना की तथा जो राजा महाराजा संस्कृति की रक्षा से विमुख हो रहे थे उनको एक सूत्र में बांधने हेतु अनेक राजाओं को सत्य विद्या की ओर लाने का प्रयास किया। महर्षि दयानंद को उनके जीवन में 16 बार जहर दिया गया और अंतिम  17 वीं बार जहर देने से  इस मानव जाति के लिए अपना बलिदान कर दिया। 

मंच की अध्यक्षता रामाआचार्य ने की  उन्होंने ईश्वर, जीव, प्रकृति के बारे में अवगत करवाया। भजनोपदेशक  उम्मेद सिंह निराला ने धर्म और संस्कृति के लिए बलिदान होने वाले क्रांतिकारियों को याद करते हुए  मधुर भजनों  की प्रस्तुति दी। महात्मा ओम मुनि ने आए हुए सभी आगंतुक अतिथियो का स्वागत एवं सम्मान किया तथा आर्य समाज की विचारधारा से अधिक से अधिक जुड़ने का आह्वान किया। आर्य समाज के  पदाधिकारीयों ने महर्षि दयानंद कृत  संस्कार विधि  एवं स्मृति चिन्ह देकर सभी भवन निर्माण में सहयोग करने वाले दानदाताओं का स्वागत सम्मान किया। कार्यक्रम का संचालन अशोक आर्य ने  किया तथा आर्य समाज के प्रधान डॉक्टर हरीश कुमार ने सभी उपस्थित जनों का आभार प्रकट किया। कार्यक्रम में भामाशाह बलबीर खटाना, धर्मपाल आर्य , राम खिलाड़ी, हनुमान मुकदम, मास्टर सुरेंद्र कुमार, मुसद्दीलाल सोनी ,लीलाराम सेन,  घीसाराम आर्य ,रामकुमार सैनी, कमलेश चाहर, हंसराज मुक्कड़ ,अमित कुमार शर्मा, डॉक्टर मनोज गुप्ता, रामनिवास गुर्जर, डॉक्टर कैलाश चंद शर्मा ,शिवराम सिंह यादव, रमेश यादव ,रामेश्वर मीणा ,धोलाराम गोलियां, लालचंद पटेल, बंसी ठेकेदार जय सिंह सरपंच ,कैलाश रईसा, महेंद्र सैनी, विश्व हिंदू परिषद कोटपूतली अध्यक्ष रोहिताश सैनी , अरुण कुमार सैनी भाजपा मंडल अध्यक्ष, ओमप्रकाश स्वामी, मोतीलाल सोनी, जगदीश आर्य ,

ताराचंद सैनी, प्रहलाद स्वामी,  नितेश कुमार आर्य, राजेश कुमार आर्य, जयराम आर्य,  भगवान सहाय लक्ष्मण सिंह आर्य ,चंद्रशेखर, रमेश कुमार आर्य , लालचंद वैद्य ,रामकरण सैनी,  गीता देवी, सुमित्रा देवी, कृष्णा देवी, मंजू देवी, कविता देवी ,मीना मीना देवी पूर्व प्रधान पंच। शाहिद अनेक महिला पुरुष एवं बच्चे उपस्थित के हुए तथा हजारों लोगों ने पंगत प्रसादी ग्रहण की। यत समिति बानसूर, आशा देवी, किरण देवी शाहिद अनेक महिला पुरुष एवं बच्चे उपस्थित रहे।