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राजस्थान: जयपुर अंतर महाविद्यालय शतरंज प्रतियोगिता के पर्यवेक्षक बने विक्रम सिंह
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संक्षेप
राजस्थान: जयपुर राजस्थान विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित होने वाली अंतर महाविद्यालय शतरंज (पुरुष एवं महिला) प्रतियोगिता के लिए इंटरनेशनल रेटेड शतरंज खिलाड़ी तथा FIDE से मान्यता प्राप्त अर्बिटर और कोच विक्रम सिंह को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। यह प्रतियोगिता 28 और 29 सितंबर 2026 को यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज, जयपुर में आयोजित की जाएगी।
विस्तार
राजस्थान: जयपुर राजस्थान विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित होने वाली अंतर महाविद्यालय शतरंज (पुरुष एवं महिला) प्रतियोगिता के लिए इंटरनेशनल रेटेड शतरंज खिलाड़ी तथा FIDE से मान्यता प्राप्त अर्बिटर और कोच विक्रम सिंह को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। यह प्रतियोगिता 28 और 29 सितंबर 2026 को यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज, जयपुर में आयोजित की जाएगी। विक्रम सिंह लंबे समय से शतरंज के क्षेत्र में सक्रिय हैं और उन्हें खेल के संचालन एवं प्रशिक्षण का व्यापक अनुभव है। उनकी नियुक्ति को प्रतियोगिता के बेहतर संचालन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय से संबद्ध विभिन्न महाविद्यालयों के पुरुष एवं महिला खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। विक्रम सिंह की शतरंज यात्रा भी उल्लेखनीय रही है। वर्ष 1990 में जयपुर में आयोजित एक सिमलटेनियस मैच के दौरान उन्होंने पांच बार के विश्व चैंपियन और ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद को पराजित किया था। यह मुकाबला उनके खेल जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। इसके अलावा वर्ष 1994 में नासिक में आयोजित ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी शतरंज प्रतियोगिता में राजस्थान विश्वविद्यालय की टीम को विजेता बनाने में भी विक्रम सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके लंबे अनुभव और शतरंज की तकनीकी समझ को देखते हुए उन्हें प्रतियोगिता की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वाणी चेस क्लब के अध्यक्ष जिनेश कुमार जैन ने विक्रम सिंह को पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाने पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विक्रम सिंह जैसे अनुभवी खिलाड़ी और FIDE मान्यता प्राप्त अर्बिटर की मौजूदगी से प्रतियोगिता के आयोजन एवं संचालन में विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा। जिनेश कुमार जैन ने कहा कि विश्वविद्यालय स्तर पर इस तरह की प्रतियोगिताएं युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान करती हैं। अनुभवी खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों की सहभागिता से शतरंज को और बढ़ावा मिलेगा तथा विद्यार्थियों में इस खेल के प्रति रुचि भी बढ़ेगी।
