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उत्तर प्रदेश: बंद आरओ, बदहाल शौचालय और मूलभूत सुविधाओं के अभाव से कर्मचारी-ग्रामीण परेशान

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उत्तर प्रदेश  Published by: Irshad ahmad , उत्तर प्रदेश  Edited By: Kunal, Date: 03/07/2026 04:27:28 pm Share:
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  • Edited By.: Kunal,
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  • 03/07/2026 04:27:28 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: गांवों के विकास की योजनाओं को धरातल पर उतारने वाला सेमरियावां विकास खंड इन दिनों अपने ही परिसर की बदहाल व्यवस्था को लेकर चर्चा में है। क्षेत्र पंचायत द्वारा गांवों में विकास कार्यों का दावा किया जा रहा है

विस्तार

उत्तर प्रदेश: गांवों के विकास की योजनाओं को धरातल पर उतारने वाला सेमरियावां विकास खंड इन दिनों अपने ही परिसर की बदहाल व्यवस्था को लेकर चर्चा में है। क्षेत्र पंचायत द्वारा गांवों में विकास कार्यों का दावा किया जा रहा है, लेकिन क्षेत्र पंचायत का अपना कार्यालय ही मूलभूत सुविधाओं के अभाव में उपेक्षा की कहानी बयां कर रहा है।
ब्लॉक परिसर में वर्षों पहले लगाया गया आरओ प्लांट लंबे समय से बंद पड़ा है। भीषण गर्मी के बीच यहां आने वाले कर्मचारी, सचिव, फरियादी और दूर-दराज के ग्रामीण शीतल पेयजल के लिए परेशान रहते हैं। कई लोगों को मजबूरी में बाजार से बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता है, जबकि सरकारी परिसर में लगा पेयजल संयंत्र धूल फांक रहा है।
कार्यालय की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। ब्लॉक प्रमुख कार्यालय की छत पर घास-फूस उग आई है, परिसर की नियमित साफ-सफाई नहीं होती और कार्यालय का एक हिस्सा वाहन पार्किंग में तब्दील हो चुका है। दूसरी ओर सचिवों के टाइप-टू आवासों के कायाकल्प का कार्य तेजी से चल रहा है, लेकिन मुख्य कार्यालय की बदहाली लोगों की समझ से परे है।

ब्लॉक परिसर में ग्राम पंचायत सेमरियावां द्वारा सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) कार्यालय के सामने सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया गया है, लेकिन वहां न पानी की व्यवस्था है और न ही नियमित सफाई होती है। ऐसे में महिलाओं, बुजुर्गों और दूर-दराज से आने वाले ग्रामीणों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। शौचालय होने के बावजूद उसका उपयोग न कर पाना व्यवस्था की लापरवाही को उजागर करता है। सेमरियावां जनपद का बड़ा विकास खंड होने के कारण प्रतिदिन सैकड़ों लोग यहां पहुंचते हैं। शादी-विवाह के रिश्तों के सिलसिले में आने वाले परिवार भी परिसर में खुले आसमान के नीचे बैठकर बातचीत करने को मजबूर हैं। न उनके बैठने की समुचित व्यवस्था है और न ही पीने के ठंडे पानी की सुविधा। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि अपने ही कार्यालय की मूलभूत समस्याओं पर ध्यान दें, बंद पड़े आरओ प्लांट को चालू कराएं, सार्वजनिक शौचालय को उपयोगी बनाएं और परिसर की साफ-सफाई व बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित करें, तो कर्मचारियों और आम जनता दोनों को बड़ी राहत मिल सकती है। सवाल यह है कि जब विकास की शुरुआत अपने ही परिसर से नहीं हो पा रही है, तो गांवों तक बेहतर व्यवस्था पहुंचाने के दावे कितने सार्थक हैं।

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