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उत्तर प्रदेश: गेहूं कटाई बना उत्सव लोक परंपराएं, बैसाखी और सामूहिक श्रम की दिखाई गई झलक

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उत्तर प्रदेश  Published by: Anand Kumar , उत्तर प्रदेश  Edited By: Kunal, Date: 15/04/2026 04:31:19 pm Share:
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  • Published by.: Anand Kumar ,
  • Edited By.: Kunal,
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  • 15/04/2026 04:31:19 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है और यहां खेती केवल आजीविका का साधन ही नहीं, बल्कि लोक संस्कृति, परंपरा और त्योहारों का भी आधार है।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है और यहां खेती केवल आजीविका का साधन ही नहीं, बल्कि लोक संस्कृति, परंपरा और त्योहारों का भी आधार है। खासकर गेहूं की फसल की कटाई का समय किसानों के लिए बहुत ही खास होता है।  महीनों की मेहनत के बाद जब खेतों में सुनहरी बालियां लहरातीं हैं, तो यह केवल उत्पादन का समय नहीं बल्कि खुशी, उत्सव और लोक परंपराओं का अवसर बन जाता है। देश के अलग-अलग राज्यों में गेहूं की कटाई के दौरान कई तरह की पारंपरिक रस्में और त्योहार म नाए जाते हैं, जो किसानों के जीवन और और प्रकृति के साथ उनके गहरे संबंध को दर्शाते हैं। 

पंजाब और हरियाणा में गेहूं की कटाई के समय बैसाखी का त्यौहार बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह त्यौहार नई फसल के आगमन की खुशी का प्रतिक है। उत्तर प्रदेश और बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में गेहूं की कटाई शुरू करने से पहले खेत मे पूजा करने की परंपरा है। कटाई से पहले हसुआ दरांती की पूजा जाती है। किसान पहली बालियों को काटकर घर लाते हैं और उन्हें भगवान को अर्पित करते हैं। इसके बाद नई फसल के आटे से रोटी, खीर या अन्य व्यंजन बनाकर परिवार के साथ खाए जाते हैं। कई जगह गांव के लोग सामूहिक रूप से भोजन भी करते हैं, जिससे सामाजिक एकता और भाईचारे की भावना मजबूत होती है। राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई गांवों में कटाई शुरू करने से पहले हल, दरांती और अन्य कृषि औजारों की पूजा की जाती है। किस मानते हैं कि इन औजारों के मदद से ही फसल तैयार होती है, इसलिए उनका सम्मान करना जरूरी है।

 कई परिवार पहली गेहूं की बालियां देवी- देवताओं को चढ़ाते हैं और घर के मंदिर में रखते हैं। यह परंपरा किसने की प्रकृति और श्रम के प्रति सम्मान को दर्शाती है। उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्रों में भी नई फसल की स्वागत की खास परंपराएं हैं। कई गांवों में किसान स्थानीय देवताओं को अन्न अर्पित करते हैं और सामूहिक पूजा का आयोजन किया जाता है। उसके बाद गांव के लोग मिलकर पारंपरिक गीत गाते हैं और सामूहिक भोज का आनंद लेते हैं। यह परंपरा सामुदायिक जीवन और सहयोग की भावना को मजबूत बनाती है। गेहूं की कटाई के समय कई क्षेत्रों में महिलाएं और पुरुष मिलकर लोकगीत गाते हुए कटाई का काम करते हैं। यह गीत खेती, प्रकृति और जीवन की खुशियों को व्यक्त करते हैं। पहले के समय में पूरे गांव के लोग मिलकर एक दूसरे के खेतों मे काम करते थे, जिसे सामूहिक श्रम की परंपरा कहा जाता था। 


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