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दिल्ली: SIR में नाम हटने पर भी नहीं छिनेगा राशन का हक, सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
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संक्षेप
दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची से नाम हटने के मामले में अहम टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति का नाम SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हट जाता है, तो भी वह राशन जैसी सरकारी सुविधाओं का हकदार बना रहेगा।
विस्तार
दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची से नाम हटने के मामले में अहम टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति का नाम SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हट जाता है, तो भी वह राशन जैसी सरकारी सुविधाओं का हकदार बना रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मतदाता सूची में नाम नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति अन्य वैधानिक अधिकारों और सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो जाएगा। अदालत की इस टिप्पणी को आम नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट की उस सुनवाई के दौरान आई, जिसमें पश्चिम बंगाल निवासी मोहिबुल्ला मंडल की याचिका पर सुनवाई की जा रही थी। याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया था कि राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से जून में जारी आदेश के आधार पर उनका राशन कार्ड रद्द, निलंबित या समाप्त न किया जाए। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि मतदाता सूची में नाम होना और सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलना दो अलग-अलग विषय हैं। किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से हटने मात्र से उसके अन्य अधिकार समाप्त नहीं हो जाते। अदालत की इस टिप्पणी के बाद यह स्पष्ट संदेश गया है कि नागरिकों को सरकारी योजनाओं और आवश्यक सुविधाओं से केवल मतदाता सूची की स्थिति के आधार पर वंचित नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता की ओर से आशंका जताई गई थी कि SIR प्रक्रिया के कारण मतदाता सूची में बदलाव होने के बाद राशन कार्ड जैसे लाभ प्रभावित हो सकते हैं। इसी को लेकर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए नागरिक अधिकारों और कल्याणकारी योजनाओं की निरंतरता को लेकर महत्वपूर्ण बात कही। हालांकि, मामले में अंतिम आदेश आना अभी बाकी है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अदालत की यह टिप्पणी सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के लिए राहत देने वाली है, क्योंकि राशन जैसी सुविधाएं नागरिकों की मूल आवश्यकताओं से जुड़ी होती हैं।
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