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मध्य प्रदेश: सनातन धर्म के मार्ग पर चलकर राष्ट्र और विश्व कल्याण का आह्वान

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मध्य प्रदेश  Published by: Ajay Singh Tomar , मध्य प्रदेश  Edited By: Shubhi Shikha Nayal, Date: 26/08/2026 03:04:12 pm Share:
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  • Published by.: Ajay Singh Tomar ,
  • Edited By.: Shubhi Shikha Nayal,
  • Date:
  • 26/08/2026 03:04:12 pm
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: पोरसा में राष्ट्र कल्याण, विश्व कल्याण, समाज कल्याण एवं व्यक्ति विशेष के कल्याण की भावना से जगह-जगह पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं महाभिषेक जैसे धार्मिक आयोजनों का आयोजन किया जा रहा है। 

विस्तार

मध्य प्रदेश: पोरसा में राष्ट्र कल्याण, विश्व कल्याण, समाज कल्याण एवं व्यक्ति विशेष के कल्याण की भावना से जगह-जगह पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं महाभिषेक जैसे धार्मिक आयोजनों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में पोरसा की कृषि उपज मंडी समिति के प्रांगण में आयोजित असंख्य पार्थिव शिवलिंग निर्माण कार्यक्रम में पधारे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शास्त्री डॉ. अनिल त्रिपाठी ‘बड़े भैया जी’ ने शिरकत की। इस अवसर पर आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने सनातन धर्म, युवा पीढ़ी और समाज के कल्याण को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। शास्त्री डॉ. अनिल त्रिपाठी ने कहा कि भारत की भूमि पुण्यभूमि है। सनातन परंपरा में भगवान एवं देवी-देवताओं के अनेक अवतारों से इस भूमि का विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज का कुछ वर्ग अपने धार्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों से भटक रहा है। ऐसे लोगों को सही मार्ग दिखाना और उन्हें अपनी संस्कृति एवं धर्म से जोड़ना हमारा प्रमुख कर्तव्य है।

उन्होंने कहा कि सभी लोगों को अपने धर्म और संस्कारों के मार्ग पर चलना चाहिए तथा अपने आराध्य का स्मरण करते हुए गुरुजनों का आशीर्वाद ग्रहण करना चाहिए। धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजनों से व्यक्ति में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और समाज में एकता, सद्भाव एवं जनकल्याण की भावना मजबूत होती है। युवा पीढ़ी की भागीदारी पर जताई खुशी डॉ. अनिल त्रिपाठी ने धार्मिक आयोजनों में युवाओं की बढ़ती भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी यदि अपनी संस्कृति, संस्कार और आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ती है तो यह समाज और राष्ट्र के लिए गर्व की बात है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी संस्कृति को समझें, अपने धर्म का सम्मान करें और समाजहित के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

उन्होंने कहा कि यज्ञ एवं धार्मिक अनुष्ठानों का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके माध्यम से विश्व शांति, सामाजिक सद्भाव और जनकल्याण की भावना को भी आगे बढ़ाया जाता है। ददादा के समय से धर्म प्रचार में सक्रिय शास्त्री डॉ. अनिल त्रिपाठी के पारिवारिक परिचय के अनुसार उनके पिता गृहस्थ संत पंडित देव प्रभाकर शास्त्री जी तथा माता स्वर्गीय श्रीमती कुंती देवी जी थीं। उनका जन्म घनश्याम बाग, कूड़ा में हुआ। बताया गया कि वे ददादा जी के समय से ही धर्म प्रचार एवं धार्मिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। शास्त्री जी के अनुसार अब तक उनके माध्यम से 137 सवा करोड़ यज्ञ तथा लगभग 2,000 असंख्य पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं महाभिषेक कार्यक्रम कराए जा चुके हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य धार्मिक चेतना के साथ-साथ समाज में शांति, सद्भाव और जनकल्याण की भावना को बढ़ावा देना है। धर्म और संस्कारों से जुड़ने का आह्वान प्रेस वार्ता के दौरान डॉ. अनिल त्रिपाठी ने कहा कि आज आवश्यकता है कि समाज अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े और युवा पीढ़ी को भी सनातन परंपराओं एवं संस्कारों की जानकारी दी जाए। उन्होंने सभी लोगों से अपने आराध्य का स्मरण करने, गुरुजनों का आशीर्वाद लेने तथा धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सार्थक बनाने का आह्वान किया। पोरसा में आयोजित असंख्य पार्थिव शिवलिंग निर्माण कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की सहभागिता और धार्मिक वातावरण के लिए सभी भक्तों को साधुवाद,,डॉ. अनिल त्रिपाठी का संदेश धर्म, संस्कार, समाज कल्याण और विश्व शांति की भावना को केंद्र में रखने वाला रहा।