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मध्य प्रदेश: डिजिटल जनगणना की तैयारी हुई तेज, पोरसा में प्रशिक्षण जारी
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: आगामी भारत की जनगणना को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। नगर में जनगणना एवं मकान सूचीकरण के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम निरंतर जारी है।
विस्तार
मध्य प्रदेश: आगामी भारत की जनगणना को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। नगर में जनगणना एवं मकान सूचीकरण के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम निरंतर जारी है। इसी क्रम में आज तृतीय बैच का प्रशिक्षण शिवम महाविद्यालय पोरसा में प्रारंभ हुआ, जो 25 अप्रैल तक चलेगा। प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जाएगी। यह पहली बार होगा जब जाति आधारित आंकड़ों को भी शामिल करते हुए पेपरलेस तरीके से मोबाइल के माध्यम से जनगणना की जाएगी। प्रशिक्षण और कार्य की समय-सीमा मकान सूचीकरण एवं मकान गणना का कार्य 1 मई 2026 से 30 मई 2026 तक किया जाएगा, जबकि सामान्य जनगणना 1 फरवरी 2027 से 28 फरवरी 2027 तक संपन्न होगी। इस व्यापक अभियान के लिए शिक्षकों , ग्राम पंचायत सचिव ,सहायक सचिव, पटवारीयो को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रशासनिक मार्गदर्शन में प्रशिक्षण यह प्रशिक्षण तहसीलदार नवीन भारद्वाज एवं नायब तहसीलदार श्याम सुंदर के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है। मास्टर ट्रेनर के रूप में वीरेंद्र सिंह तोमर, राघवेंद्र शर्मा (महुआ), राजीव जैन ,मनोज पचौरी, राघवेंद्र शर्मा (संगोली), एवं रविकांत आचार्य द्वारा प्रगणक एवं सुपरवाइजर को विस्तृत जानकारी दी जा रही है। प्रत्येक बैच में लगभग 150 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इससे पहले प्रथम बैच 15 से 17 अप्रैल तथा द्वितीय बैच 19 से 21 अप्रैल तक आयोजित किया जा चुका है। अब तीसरा बैच 23 से 25 अप्रैल तक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है। क्या सिखाया जा रहा है प्रशिक्षण में प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को जनगणना से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी दी जा रही है। परिवार की परिभाषा, मकान की पहचान, वैवाहिक स्थिति के आधार पर परिवारों का विभाजन, अलग-अलग रसोई होने पर अलग परिवार की गणना, तथा मुख्य द्वार के आधार पर भवन की पहचान जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया जा रहा है। डिजिटल जनगणना से बढ़ेगी सटीकता इस जनगणना का मुख्य उद्देश्य सामाजिक, आर्थिक और जनसंख्या से जुड़े सटीक आंकड़े एकत्रित करना है, ताकि शासन इन आंकड़ों के आधार पर बेहतर जनकल्याणकारी योजनाएं बना सके। मोबाइल आधारित प्रणाली से पारदर्शिता और सटीकता दोनों में वृद्धि होने की उम्मीद है। शिवम महाविद्यालय परिसर में तीन अलग-अलग कक्षों में प्रशिक्षण सत्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां शिक्षकों को व्यवहारिक एवं तकनीकी दोनों तरह की जानकारी दी जा रही है। जनगणना का यह आधुनिक स्वरूप न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करेगा, बल्कि भविष्य की योजनाओं के लिए मजबूत आधार भी तैयार करेगा।
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