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राजस्थान: ओम बिरला ने किया आह्वान—राजस्थान बने विश्व शिक्षा केंद्र

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राजस्थान  Published by: Manoj Kumar Chordiya , राजस्थान  Edited By: Kunal, Date: 23/04/2026 06:02:33 pm Share:
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  • Published by.: Manoj Kumar Chordiya ,
  • Edited By.: Kunal,
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  • 23/04/2026 06:02:33 pm
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संक्षेप

राजस्थान:  लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कहा है कि राजस्थान दुनिया का सर्वश्रेष्ठ शिक्षा का केंद्र बने। दुनिया भर के देश के युवा राजस्थान में पढ़ने आए। ऐसा हम सभी को मिलजुल कर प्रयास करना होगा। दृ

विस्तार

राजस्थान:  लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कहा है कि राजस्थान दुनिया का सर्वश्रेष्ठ शिक्षा का केंद्र बने। दुनिया भर के देश के युवा राजस्थान में पढ़ने आए। ऐसा हम सभी को मिलजुल कर प्रयास करना होगा। दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास से यह संभव हो सकेगा।
श्री बिरला और राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने बुधवार को जयश्री पेरिवाल ग्लोबल विद्यालय के नवीन परिसर का उ‌द्घाटन किया। श्री बिड़ला और श्री देवनानी ने नवनिर्मित भवन में बनाए गए आधुनिक कक्षा कक्षों का अवलोकन किया।
श्री बिरला ने कहा कि हमारे देश का संविधान विश्व की अन्य देशों की लोकतंत्र का मार्गदर्शक बन गया है लोकतंत्र हमारी ताकत है। उन्होंने बदलते भारत की तस्वीर में सहभागी बनने के लिए लोगों का आव्हान किया।

राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि यह केवल एक भवन का उ‌द्घाटन नहीं, बल्कि भारत के उज्ज्वल भविष्य का द्वार खोलने का क्षण है। यह परिसर ऐसा प्रतीत होता है मानो ज्ञान ने स्वयं एक नया घर चुन लिया हो। श्री देवनानी ने कहा कि शिक्षा केवल अक्षरज्ञान नहीं, बल्कि वह अग्नि है जो व्यक्ति के भीतर छिपी चेतना को प्रज्ज्वलित करती है और उसे साधारण से असाधारण बनाती है। उन्होंने नालंदा और तक्षशिला जैसे प्राचीन ज्ञान केंद्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत सदैव से जान का वैश्विक केंद्र रहा है और आज पुनः उसी गौरव की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि इतिहास में अनेक आक्रमणों के बावजूद भारत की ज्ञान परंपरा को समाप्त नहीं किया जा सका, क्योंकि ज्ञान अमर है। आज देश प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आर्थिक, सांस्कृतिक और आत्मिक रूप से पुनर्जागरण की और है तथा "विकसित भारत" का संकल्प साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

श्री देवनानी ने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने शिक्षकों और बड़ों से भारत की महान परंपराओं और उपलब्धियों के बारे में जानें। उन्होंने कहा कि एक समय विश्वभर से लोग भारत में शिक्षा प्राप्त करने आते थे और आज भी भारत अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है। विद्यार्थियों को विदेश में शिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहिए और जो भी ज्ञान अर्जित करें, उसे राष्ट्र निर्माण में लगाना चाहिए। प्रारंभ में कार्यक्रम की जानकारी विद्यालय की चेयपर्सन  जयश्री पेरिवाल ने दी। इस अवसर पर आयुष पेरिवाल और विद्यालय की प्राचार्य  मंजू खोसला सहित अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद थे।