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उत्तर प्रदेश: संतकबीरनगर में तेज हवा-बारिश से खेतों में बिछी फसल, किसानों की बढ़ी चिंता
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: सेमरियावां संतकबीरनगर क्षेत्र में तेज हवा के साथ हुई बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। मौसम के अचानक बदले मिजाज से खेतों में खड़ी फसल प्रभावित हुई है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: सेमरियावां संतकबीरनगर क्षेत्र में तेज हवा के साथ हुई बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। मौसम के अचानक बदले मिजाज से खेतों में खड़ी फसल प्रभावित हुई है। तेज हवाओं के चलते कई स्थानों पर फसल खेतों में बिछ गई। बारिश और हवा की मार से फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। महीनों की मेहनत और लागत के बाद तैयार हो रही फसल की यह स्थिति देखकर किसानों के चेहरे पर मायूसी साफ दिखाई दे रही है। किसानों के लिए खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीदों का आधार होती है। फसल तैयार करने के लिए किसान बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर काफी खर्च करते हैं। इसके साथ ही दिन-रात मेहनत कर फसल की देखभाल करते हैं। ऐसे में ऐन वक्त पर तेज हवा और बारिश का सामना करना पड़ने से उनकी चिंता बढ़ गई है। खेतों में फसल बिछने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। खेतों में बिछी फसल देखकर बढ़ी चिंता तेज हवा के कारण खेतों में खड़ी फसल जमीन पर गिर गई। बारिश से खेतों में नमी बढ़ने के साथ फसल के प्रभावित होने की आशंका भी है। किसानों को चिंता है कि यदि मौसम का मिजाज इसी तरह बना रहा तो फसल को और नुकसान हो सकता है। खेतों में गिरी फसल को देखकर किसान नुकसान का आकलन करने में जुटे हैं। किसानों ने जताई चिंता उसरा शहीद के किसान अब्दुल अहद, चोरहा के कासिम अली, दानुकुइया के असाद अहमद तथा रामसागर, रक्सा देवई गांव के किसानों के सामने भी मौसम की मार से फसल को हुए नुकसान की चिंता है। किसानों का कहना है कि खेती में पूरे सीजन मेहनत और पूंजी लगाने के बाद जब फसल तैयार होने की उम्मीद रहती है, तभी मौसम की मार परेशानी बढ़ा देती है। खेतों में फसल गिरने से उपज प्रभावित होने की आशंका है। किसानों को अब मौसम साफ होने और फसल को आगे नुकसान से बचाने की उम्मीद है। लागत निकालना भी हो सकता है मुश्किल खेती में लगातार बढ़ती लागत के बीच मौसम की मार किसानों के सामने नई चुनौती बनकर आई है। किसानों का कहना है कि फसल पर नुकसान होने से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। पहले ही बीज, खाद, डीजल और सिंचाई पर खर्च करना पड़ता है। ऐसे में फसल खराब होने से लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है। मौसम ने बढ़ाई किसानों की परेशानी किसानों को अब मौसम साफ होने और फसल को आगे नुकसान से बचाने की उम्मीद है। वहीं, प्रभावित खेतों में नुकसान का सही आकलन होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। तेज हवा और बारिश ने एक बार फिर खेती को मौसम पर निर्भर होने की चुनौती सामने रख दी है। किसानों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग की ओर से प्रभावित फसलों का जायजा लेकर नुकसान का आकलन किया जाएगा।
