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उत्तर प्रदेश: बरेली में एमआरपी से ज्यादा वसूली का खेल आया सामने
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: बरेली में गुटखा-सिगरेट का काला खेल! एमआरपी से ज्यादा वसूली, विभाग बना हुआ है मौन बरेली में गुटखा-सिगरेट का काला खेल! एमआरपी से ज्यादा वसूली, विभाग बना हुआ है मौन एमआरपी से ज्यादा सूली! बरेली में गुटखा-सिगरेट का
विस्तार
उत्तर प्रदेश: बरेली में गुटखा-सिगरेट का काला खेल! एमआरपी से ज्यादा वसूली, विभाग बना हुआ है मौन बरेली में गुटखा-सिगरेट का काला खेल! एमआरपी से ज्यादा वसूली, विभाग बना हुआ है मौन एमआरपी से ज्यादा सूली! बरेली में गुटखा-सिगरेट का काला कारोबार हुआ बेनकाब जीएसटी के नाम पर जेब कटाई? पुराने पैकेट पर नई कीमत से मचा बवाल करोड़ों का माल डंप, बिल गायब! बरेली के थोक बाजार पर उठे कई गंभीर सवाल 5 का 7, 10 का 12! गुटखा बाजार में खुली लूट या प्रशासन की ढील? अघोषित गोदामों से हो रहा बड़ा खेल, उपभोक्ता बेहाल—आख़िर कब जागेगा सिस्टम बरेली बरेली। जनपद में गुटखा और सिगरेट के कारोबार को लेकर बड़ा खेल सामने आ रहा है। आरोप है कि थोक विक्रेता और विभिन्न कंपनियों के डिस्ट्रीब्यूटर जीएसटी बढ़ने की आड़ में करोड़ों का माल ऊंचे दामों पर खपाकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग खामोशी साधे बैठा है। इसका सीधा असर छोटे दुकानदारों और आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है अघोषित गोदामों में करोड़ों का स्टॉक। कुछ दुकानदार बढ़ी लागत और सप्लाई की दिक्कतों का हवाला दे रहे हैं, लेकिन जानकारों का साफ कहना है कि जीएसटी बढ़ोतरी की चर्चा भर से पुराने स्टॉक पर नई कीमत वसूलना गलत है छोटे दुकानदार भी परेशान छोटे दुकानदारों का आरोप है कि थोक बाजार से ही बढ़ी कीमत पर माल दिया जा रहा है, जिससे उन्हें मजबूरी में ग्राहकों से ज्यादा वसूली करनी पड़ रही है। ऐसे में सबसे ज्यादा मार आम जनता और फुटकर व्यापारियों पर पड़ रही है प्रशासन की चुप्पी पर सवाल जनपद के कई हिस्सों से शिकायतें आने के बावजूद अभी तक किसी बड़ी कार्रवाई की सूचना नहीं है। सवाल उठ रहा है कि क्या विभाग जांच करेगा या फिर यह खेल यूं ही चलता रहेगा बने रहें आप “मीडिआ अलर्ट” के साथ: आगे होगें और भी बड़े खुलासा।
सूत्रों के मुताबिक मीरगंज फतेहगंजआंवला, देवचरा, भमोरा, फरीदपुर, नवाबगंज, रिठौरा, बहेड़ी, भोजीपुरा, फतेहगंज पूर्वी- समेत शहर के श्यामगंज-शहदाना, किला और कुतुबखाना इलाकों में कई थोक विक्रेताओं ने बड़े पैमाने पर माल जमा कर रखा है बताया जा रहा है कि कई स्थानों पर अघोषित गोदामों में करोड़ों रुपये का स्टॉक डंप है और खरीद का पक्का बिल तक नहीं दिया जा रहापुराने एमआरपी पर नई वसूली
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बाजार में पुराने पैकिंग वाले उत्पाद, जिन पर पहले से एमआरपी छपी हुई है, उन्हें बढ़े हुए दामों पर बेचा जा रहा है। उदाहरण के तौर पर: Kamla Pasand – 5 रुपये की जगह 7 रुपये Dilbagh – 5 रुपये की जगह 7 रुपये
Rajnigandha – 10 रुपये की जगह 12 रुपये Capstan – 7 रूपये की जगह 8 रूपये उपभोक्ताओं का सीधा सवाल है जब पैकेट पर पुरानी कीमत छपी है तो ज्यादा वसूली किस अधिकार से कानून क्या कहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक नया रेट छपा हुआ पैकेट बाजार में नहीं आता, तब तक पुराने एमआरपी वाले माल को महंगे दामों पर बेचना उपभोक्ता अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। एमआरपी से एक रुपये भी ज्यादा लेना गैरकानूनी माना जाता है।
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