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उत्तर प्रदेश: मनरेगा बचाओ यात्रा को गाजीपुर में मिला जनसमर्थन, महिला मजदूरों से किया संवाद

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उत्तर प्रदेश  Published by: Ramkesh Vishwakarma , Date: 13/02/2026 12:04:00 pm Share:
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  • 13/02/2026 12:04:00 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: मोदी सरकार द्वारा मनरेगा में किए गए मजदूर विरोधी बदलावों और नए कानून VB-G RAM G के विरोध में निकाली जा रही युवा गांधीवादियों की ‘मनरेगा बचाओ यात्रा’ आज बृहस्पतिवार 12 फ़रवरी को सामाजिक कार्यकर्ता सावित्री पासवान के नेतृत्व में

विस्तार

उत्तर प्रदेश: मोदी सरकार द्वारा मनरेगा में किए गए मजदूर विरोधी बदलावों और नए कानून VB-G RAM G के विरोध में निकाली जा रही युवा गांधीवादियों की ‘मनरेगा बचाओ यात्रा’ आज बृहस्पतिवार 12 फ़रवरी को सामाजिक कार्यकर्ता सावित्री पासवान के नेतृत्व में सादात के डोरा गाँव से निकलकर डोरियाँ, शिकारपुर, उकराव में महिला मज़दूरों से संवाद करते हुए, गहनी, प्यारेपुर चट्टी में महिला मज़दूरों से संवाद करते हुए, डढ़वाल, आतमपुर, छपरा से रघुवंश चौराहा पर मीडिया को संबोधित करते हुए सिसवापार, बुढ़नपुर में महिलाओं से संवाद करते हुए फिर सरदरपुर में सभा करते हुए कनेरी, रफ़ीपुर होते हुए सैदपुर पहुँची।  गांधीवादी युवाओं ने गाँव-गाँव पहुंचकर महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने को साकार करने वाले मनरेगा जैसे अधिकार आधारित क़ानून के बहाली का संकल्प लिया और नये क़ानून VB- G RAM G के आने के बाद महिला मज़दूरों के मन में पैदा हुए अविश्वास को समझा।

17 जनवरी को चौरी-चौरा (गोरखपुर) से प्रारंभ हुई मनरेगा बचाओ साइकिल यात्रा जो गोरखपुर, देवरिया, बलिया, मऊ, ग़ाज़ीपुर होते हुए बनारस जा रही है जहाँ 17 फ़रवरी को इस यात्रा का एक दिवसीय उपवास के साथ समापन होना है। यात्रा के दौरान सभा को संबोधित करते हुए यात्री मृत्युंजय मौर्या ने कहा कि सरकार VB-G RAM G जैसे मजदूर विरोधी कानून लाकर मनरेगा को खत्म करने की साजिश कर रही है। इससे गरीब, पिछड़े वर्ग, दलित, भूमिहीन मजदूर और महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित होंगी। यात्री रजत ने कहा कि मनरेगा क़ानून लागू होने के बाद बड़ी संख्या में महिलाओं को काम मिला इससे आर्थिक और सामाजिक रूप से महिलाएँ सुदृढ़ हो रही थीं। मोदी सरकार के इस हमले के बाद अब वे महिलाएँ फिर से घरों में क़ैद हो जाएंगी। 

यात्री विवेक ने कहा कि मोदी सरकार पूँजीपतियों के लाखों करोड़ों रुपये के कर्ज माफ़ कर रही है और कौड़ियों के भाव अडानी को देश की सरकारी संपत्तियां नीलाम कर रही है, उसी कड़ी में यह मज़दूर विरोधी सरकार मनरेगा को ख़त्म करके कॉर्पोरेट को सस्ता श्रम उपलब्ध कराने का रास्ता खोल रही है। यात्रा के दौरान सभी यात्री नए क़ानून के आने के बाद मनरेगा मजदूरों के मन में पैदा हुई अनिश्चितताओं और आशंकाओं को भी लगातार संकलित कर रहे हैं और यात्रा के बाद सरकार को पूर्वांचल के मज़दूरों के मन में अपनी रोज़ी रोटी की सुरक्षा को लेकर व्याप्त भय से अवगत भी करायेंगे। 

यात्रा की प्रमुख मांगें: 1) काम के संवैधानिक अधिकार को बहाल किया जाए 2) मजदूर विरोधी कानून VB-G RAM G को तुरंत वापस लिया जाए 3) मनरेगा की न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन की जाए। यात्रा में मुख्य रूप से मृत्युंजय मौर्या, सतीश साहनी, प्रवीण वर्मा, राहुल पवारा (महाराष्ट्र), प्रियेश, रजत, विवेक मिश्र, नीरज कुमार, विवेक यादव (मध्य प्रदेश), नजम शमीम, तौहीद बेग, सूफी सलीम, विवेक विराट (समस्तीपुर), सुमन आनंद, कन्हैया साहनी, शांतनु, गौरव पुरोहित (पश्चिम बंगाल), बृजेश साहनी, गौरव पांडेय, संगम गुप्ता, राशिद शेख (बेगूसराय), राजू कुमार (सहरसा), विवेक कुमार(नालंदा) डॉ शैलेंद्र कुमार (नवादा), निर्भय अहिरवार (मध्य प्रदेश) आदि शामिल हैं।