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उत्तर प्रदेश: धान की फसल में कीटों का प्रकोप, कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: मौसम में बदलाव और खेतों में नमी के बीच धान की फसल में कीटों का प्रकोप शुरू हो गया है। धान की फसल इस समय बढ़वार की अवस्था में है। इसे देखते हुए जिला कृषि रक्षा
विस्तार
उत्तर प्रदेश: मौसम में बदलाव और खेतों में नमी के बीच धान की फसल में कीटों का प्रकोप शुरू हो गया है। धान की फसल इस समय बढ़वार की अवस्था में है। इसे देखते हुए जिला कृषि रक्षा अधिकारी रतन शंकर ओझा ने किसानों को फसल की लगातार निगरानी करने और कीट दिखाई देने पर समय से नियंत्रण के उपाय अपनाने की सलाह दी है। कीट के अनुसार दवा के प्रयोग की सलाह दीमक और जड़ की सूंडी के नियंत्रण के लिए क्लोरोपायरीफास 20 प्रतिशत की 2.5 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करने अथवा कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 4जी की 18 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर 3 से 5 सेंटीमीटर स्थिर पानी में बुरकाव करने की सलाह दी गई है। हरे और भूरे फुदकों के नियंत्रण के लिए ब्यूप्रोफेजिन 25 प्रतिशत एससी की 330 मिलीलीटर मात्रा प्रति एकड़, एसिटामिप्रिड 20 प्रतिशत एसपी की 100 ग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल की 125 मिलीलीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर 500 लीटर पानी में घोलकर शाम के समय छिड़काव करने को कहा गया है। तना बेधक, पत्ती लपेटक और हिस्पा के नियंत्रण के लिए क्लोरेन्ट्रानिलीप्रोल 9.3 प्रतिशत + लैम्ब्डासाइहैलोथ्रिन 4.6 प्रतिशत जेडसी की 100 मिलीलीटर मात्रा प्रति एकड़ अथवा कारटाप 4जी की 18 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर प्रयोग करने की सलाह दी गई है।कृषि विभाग ने किसानों से खेतों में कीटों की नियमित निगरानी करने और प्रकोप की स्थिति में अनुशंसित दवाओं का निर्धारित मात्रा में ही प्रयोग करने की अपील की है।
कृषि रक्षा अधिकारी के अनुसार धान में इस समय दीमक, जड़ की सूंडी (रूट बोरर), पत्ती लपेटक और तना बेधक का प्रकोप देखा जा रहा है। कुछ स्थानों पर हरे और भूरे फुदकों का प्रकोप भी हो सकता है। इनके प्रकोप से पत्तियां पीली होकर नोक से सूखने लगती हैं। अधिक प्रकोप होने पर हॉपर-बर्न की स्थिति में पौधे भूरे-काले होकर सूख जाते हैं।
