Contact for Advertisement 9650503773


उत्तर प्रदेश: कुम्हार परिवार का हस्तशिल्प अवलोकन, कारीगरों को मेले में मिली प्राथमिकता

- Photo by : social media

उत्तर प्रदेश  Published by: Raju(UP) , Date: 19/02/2026 01:22:36 pm Share:
  • उत्तर प्रदेश
  • Published by: Raju(UP) ,
  • Date:
  • 19/02/2026 01:22:36 pm
Share:

संक्षेप

उत्तर प्रदेश: बरेली पारंपरिक कला और स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देने की दिशा में गुरुवार को एक सकारात्मक कदम देखने को मिला, जब Bareilly Cantonment Board की टीम शहर के एक कुम्हार परिवार के घर पहुंची।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: बरेली पारंपरिक कला और स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देने की दिशा में गुरुवार को एक सकारात्मक कदम देखने को मिला, जब Bareilly Cantonment Board की टीम शहर के एक कुम्हार परिवार के घर पहुंची। अधिकारियों ने वहां बन रहे मिट्टी के दीयों और अन्य मृद्भांडों के निर्माण कार्य का बारीकी से अवलोकन किया और कारीगरों से सीधे संवाद स्थापित कियासीमित साधन, असीम मेहनत निरीक्षण के दौरान टीम ने देखा कि बेहद सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार बड़ी संख्या में दीये तैयार कर रहा है। आंगन में कतारबद्ध धूप में सूखते दीये और पूरे परिवार की मेहनत ने अधिकारियों को प्रभावित किया। मिट्टी गूंथने से लेकर आकार देने और सुखाने तक की पूरी प्रक्रिया को समझा गया। अधिकारियों ने मौके पर ही कारीगरों से उनकी प्रमुख दिक्कतों के बारे में बातचीत की। कारीगरों ने बताया कि उन्हें बाजार तक सीधी पहुंच नहीं मिल पाती, कच्चे माल की कीमतें बढ़ रही हैं और आर्थिक स्थिति भी चुनौतीपूर्ण हैइस दौरान कैंट बोर्ड की सीईओ Tanu Jain ने आश्वस्त किया कि आने वाले मेलों, प्रदर्शनियों और सामुदायिक आयोजनों में स्थानीय कारीगरों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि उन्हें बेहतर मंच और खरीदार मिल सकें।

वोकल फॉर लोकल’ को जमीनी समर्थन

बोर्ड प्रतिनिधियों ने कहा कि पारंपरिक शिल्पकला सिर्फ रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से न केवल कारीगरों को संबल मिलेगा, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की सोच को भी मजबूती मिलेगी। यह पहल कारीगरों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। अगर प्रशासन और समाज मिलकर स्थानीय शिल्पकारों का साथ दें, तो मिट्टी के ये छोटे-छोटे दीये हजारों घरों में रोशनी के साथ-साथ कारीगरों के जीवन में भी उजाला भर सकते हैं। इस त्योहार पर स्थानीय कारीगरों से दीये और हस्तशिल्प खरीदें, और ‘वोकल फॉर लोकल’ को सच में सफल बनाएं।