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उत्तर प्रदेश: सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक में बीता वक्त, 6 वर्षीय मासूम की मौत

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उत्तर प्रदेश  Published by: ANAND KUMAR PANDEY , उत्तर प्रदेश  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 10/08/2026 10:17:58 am Share:
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  • Published by.: ANAND KUMAR PANDEY ,
  • Edited By.: Kunal Tewatia,
  • Date:
  • 10/08/2026 10:17:58 am
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: बैरिया क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। प्राथमिक विद्यालय धरमबाग में कक्षा-1 में पढ़ने वाले 6 वर्षीय छात्र शिवम शाह की सर्पदंश के बाद मौत हो गई। मासूम की मौत से परिवार के साथ-साथ विद्यालय और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: बैरिया क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। प्राथमिक विद्यालय धरमबाग में कक्षा-1 में पढ़ने वाले 6 वर्षीय छात्र शिवम शाह की सर्पदंश के बाद मौत हो गई। मासूम की मौत से परिवार के साथ-साथ विद्यालय और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। विद्यालय की ओर से जारी शोक संदेश के अनुसार, शिवम शाह पुत्र शैलेंद्र शाह, निवासी ग्राम सुरेमनपुर, का इसी सत्र में 1 जुलाई 2026 को प्राथमिक विद्यालय धरमबाग में नामांकन हुआ था। वह अभी अपनी शिक्षा की पहली सीढ़ी पर ही कदम रख रहा था।
बताया गया कि 7 अगस्त 2026 को विद्यालय की छुट्टी के बाद शिवम के घर के आसपास उसे जहरीले सांप ने डस लिया। परिवार सड़क किनारे झोपड़ी में रहता है और आसपास घनी झाड़ियां व पेड़-पौधे हैं।

आरोप है कि सर्पदंश के बाद बच्चे को तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय परिजन झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ गए। इलाज में हुई देरी के कारण मासूम की हालत बिगड़ती गई और आखिरकार उसकी मौत हो गई। विद्यालय परिवार ने जताया गहरा दुख मासूम की मौत पर प्राथमिक विद्यालय धरमबाग के प्रधानाध्यापक एवं समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं ने गहरा शोक व्यक्त किया। विद्यालय परिवार ने कहा कि इस कठिन घड़ी में पूरा विद्यालय परिवार पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है और ईश्वर से दिवंगत बालक की आत्मा की शांति तथा परिजनों को यह असहनीय दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना करता है।

सर्पदंश पर झाड़-फूंक नहीं, तुरंत अस्पताल जरूरी। यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है। सांप के काटने पर झाड़-फूंक, ओझा-सोखा या घरेलू उपचार में समय गंवाना जानलेवा हो सकता है। सर्पदंश की स्थिति में पीड़ित को बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाना चाहिए, जहां चिकित्सकीय उपचार और आवश्यकता पड़ने पर एंटी-स्नेक वेनम (ASV) दिया जा सकता है। एक सही समय पर लिया गया फैसला किसी मासूम की जिंदगी बचा सकता है।