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उत्तर प्रदेश: एमएलसी के नाम से फर्जी लेटर, 4.08 करोड़ के अनुदान पर बवाल

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उत्तर प्रदेश  Published by: Ramkesh Vishwakarma , उत्तर प्रदेश  Edited By: Shubhi Shikha Nayal, Date: 10/08/2026 10:54:14 am Share:
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  • Published by.: Ramkesh Vishwakarma ,
  • Edited By.: Shubhi Shikha Nayal,
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  • 10/08/2026 10:54:14 am
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: जमानियां नगर पालिका परिषद में करीब 4.08 करोड़ रुपये के सरकारी अनुदान से जुड़े प्रस्ताव को लेकर कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: जमानियां नगर पालिका परिषद में करीब 4.08 करोड़ रुपये के सरकारी अनुदान से जुड़े प्रस्ताव को लेकर कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि पंडित दीनदयाल नगर विकास योजना के तहत अनुदान हासिल करने के लिए एमएलसी विशाल सिंह चंचल के नाम और कथित हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर फर्जी पत्र तैयार किए गए। मामले में एमएलसी प्रतिनिधि डॉ. प्रदीप पाठक की तहरीर पर जमानियां कोतवाली पुलिस ने नगर पालिका अध्यक्ष जयप्रकाश गुप्ता और उनके सहयोगियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। तहरीर के मुताबिक, कथित तौर पर तैयार किए गए दो पत्रों पर 45358 और 9484 क्रमांक दर्ज थे। इन पत्रों पर 10 जून 2026 की तारीख अंकित थी। आरोप है कि पत्रों पर एमएलसी विशाल सिंह चंचल के नाम से कूटरचित हस्ताक्षर किए गए। इन्हीं पत्रों के जरिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में पंडित दीनदयाल नगर विकास योजना के तहत 408.68 लाख रुपये यानी करीब 4.08 करोड़ रुपये के अनुदान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया।

बताया गया है कि प्रस्तावित धनराशि से जमानियां नगर क्षेत्र में प्रकाश व्यवस्था को बेहतर बनाने की योजना थी। इसके तहत मुख्य मार्गों पर 7 मीटर और 9 मीटर ऊंचे ऑक्टागोनल पोल और लाइटें लगाने का प्रस्ताव रखा गया था। आरोप है कि इसी प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए एमएलसी के नाम और कथित हस्ताक्षर वाले पत्रों का इस्तेमाल किया गया।जब संबंधित पत्र एमएलसी कार्यालय पहुंचे तो उनकी जांच कराई गई। कार्यालय की ओर से पत्रों को कथित तौर पर फर्जी बताया गया। इसके बाद नगर विकास मंत्री को मामले की जानकारी देकर प्रस्तावित अनुदान की कार्रवाई रोकने और कानूनी कार्रवाई की मांग की गई। इसके बाद एमएलसी प्रतिनिधि डॉ. प्रदीप पाठक ने पुलिस को तहरीर दी।

एसपी ग्रामीण अतुल सोनकर के अनुसार, 7 अगस्त को मिली तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 319(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) और 3(5) के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि कथित फर्जी पत्र कहां तैयार किए गए, इन्हें किसने तैयार किया और सरकारी प्रक्रिया में इन्हें किस स्तर पर इस्तेमाल किया गया। शासन को भेजे गए दस्तावेजों और प्रस्ताव तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है। जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल करीब 4.08 करोड़ रुपये के सरकारी अनुदान से जुड़े इस मामले ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि कथित कूटरचित दस्तावेज किसने तैयार किए और सरकारी प्रक्रिया में उनका इस्तेमाल किस स्तर तक किया गया।