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उत्तर प्रदेश: कृषि भवन से जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने दिखाई हरी झंडी, उन्नत खेती की तकनीक सीखेंगे किसान
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: बस्ती में किसानों को आधुनिक और उन्नत कृषि तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से जिले के 60 किसानों का दल सात दिवसीय अंतरराज्यीय प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम के लिए उत्तराखंड के पंतनगर रवाना हुआ।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: बस्ती में किसानों को आधुनिक और उन्नत कृषि तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से जिले के 60 किसानों का दल सात दिवसीय अंतरराज्यीय प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम के लिए उत्तराखंड के पंतनगर रवाना हुआ। मंगलवार को कृषि भवन बस्ती से विधायक प्रतिनिधि सरोज मिश्र, संयुक्त कृषि निदेशक राम बचन राम, उप कृषि निदेशक अशोक कुमार और जिला कृषि अधिकारी डॉ. बाबूराम मौर्य ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर किसानों के दल को रवाना किया। इस दौरान किसानों का फूल-माला पहनाकर स्वागत भी किया गया। उप कृषि निदेशक अशोक कुमार ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में केंद्र पुरोनिधानित सपोर्ट टू स्टेट एक्सटेंशन प्रोग्राम्स फॉर एक्सटेंशन रिफार्म्स योजना के तहत नेशनल मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन योजना के अंतर्गत किसानों का चयन किया गया है। जिले के प्रत्येक विकासखंड से चार-चार किसानों और साऊंघाट विकासखंड से आठ किसानों का चयन किया गया है। इस प्रकार कुल 60 किसानों का दल तैयार किया गया है। यह दल उत्तराखंड स्थित आचार्य गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर में सात दिवसीय प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम में हिस्सा लेगा। प्रशिक्षण के दौरान कृषि वैज्ञानिक किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों, तकनीकों और बेहतर उत्पादन के तौर-तरीकों की जानकारी देंगे। श्री अन्न और जैविक खेती की तकनीक सीखेंगे किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान किसानों को मोटे अनाज यानी श्री अन्न, जैविक खेती, बीज उत्पादन, फसल विविधीकरण, जल प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य और कृषि यंत्रीकरण सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही किसानों को खेती में नई तकनीकों के प्रयोग और कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल करने के तरीकों से भी परिचित कराया जाएगा। उप कृषि निदेशक ने बताया कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जिले के किसानों को प्रदेश से बाहर अपनाई जा रही उन्नत कृषि पद्धतियों से रूबरू कराना है। प्रशिक्षण से प्राप्त जानकारी को किसान अपने खेतों में लागू कर उत्पादन बढ़ाने और कृषि लागत कम करने की दिशा में काम कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक खेती को अपनाने से किसानों की उत्पादकता में सुधार के साथ उनकी आय बढ़ाने के प्रयासों को भी गति मिलेगी। प्रशिक्षण से लौटने के बाद किसान अपने अनुभवों और नई तकनीकों की जानकारी अन्य किसानों के साथ भी साझा कर सकेंगे।
