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उत्तर प्रदेश: आवारा कुत्तों का आतंक, दो महिलाओं को काटा; ARS के लिए जिला अस्पताल किया रेफर
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: सेमरियावां क्षेत्र में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: सेमरियावां क्षेत्र में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को कुत्ते के काटने की अलग-अलग घटनाओं में अफरा खातून पुत्री सज्जाक अहमद और उसरा शहीद निवासी जालिमुन्निशा पत्नी मोहम्मदुल्लाह (55 वर्ष) घायल हो गईं। दोनों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सेमरियावां लाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकीय आवश्यकता को देखते हुए एंटी रेबीज सीरम (ARS) के लिए जनपद संतकबीरनगर स्थित जिला अस्पताल रेफर किया गया। सीएचसी सेमरियावां में दोनों घायलों का प्राथमिक उपचार किया गया। अफरा खातून के ओपीडी प्रपत्र में Dog Bite दर्ज किया गया है। उन्हें टिटनेस से बचाव का इंजेक्शन और एंटी रेबीज वैक्सीन की प्रक्रिया के तहत उपचार दिया गया। इसके बाद चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार आगे के उपचार के लिए दोनों को जिला अस्पताल भेजा गया। गलियों और रास्तों पर बढ़ा आवारा कुत्तों का खतरा ग्रामीणों के अनुसार सेमरियावां क्षेत्र के कई गांवों में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। गलियों, बाजारों और सार्वजनिक रास्तों पर झुंड में घूमने वाले कुत्तों के कारण राहगीरों में भय बना हुआ है। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को लेकर परिवारों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से आवारा कुत्तों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अभियान चलाने की मांग की है। सीएचसी अधीक्षक ने बताया समय पर इलाज से ही बचाव सीएचसी सेमरियावां के अधीक्षक डॉ. सुरेश चंद्र ने बताया कि कुत्ते के काटने की घटना को किसी भी हालत में हल्के में नहीं लेना चाहिए। कुत्ते के काटते ही घाव को तत्काल साबुन और बहते पानी से करीब 15 मिनट तक अच्छी तरह साफ करना चाहिए। इसके बाद बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।उन्होंने बताया कि डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटी रेबीज वैक्सीन की निर्धारित सभी खुराक समय से लगवाना बेहद आवश्यक है। चिकित्सकीय आवश्यकता होने पर एंटी रेबीज सीरम (ARS) भी लगाया जाता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि कुत्ते के काटने के बाद झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के भरोसे समय बर्बाद न करें, बल्कि तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें। डॉ. सुरेश चंद्र ने बताया कि अभिभावकों को बच्चों के प्रति विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए और उन्हें आवारा कुत्तों के झुंड से दूर रखना चाहिए। लगातार सामने आ रही कुत्तों के हमले की घटनाओं के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन व संबंधित विभाग से आवारा कुत्तों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी अन्य व्यक्ति को इनका शिकार न होना पड़े।
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