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Uttrakhand News: उत्तराखण्ड बोर्ड बना शिक्षा व्यवस्था की मजबूत रीढ़, लाखों छात्रों के भविष्य की बनी नींव
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संक्षेप
उत्तराखंड: उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा परिषद् राज्य की माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था का प्रमुख स्तंभ है, जो उत्तराखण्ड सरकार के शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्य करती है।
विस्तार
उत्तराखंड: उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा परिषद् राज्य की माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था का प्रमुख स्तंभ है, जो उत्तराखण्ड सरकार के शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्य करती है। यह संस्था राज्य के हाई स्कूल एवं इण्टरमीडिएट स्तर के छात्रों के लिए पाठ्यक्रम निर्धारण के साथ-साथ वार्षिक बोर्ड की परीक्षाएँ का आयोजन करती है। वर्तमान में परिषद् से 10,000 से अधिक विद्यालय जुड़े हुए हैं और हर वर्ष लगभग 3 लाख से अधिक छात्र-छात्राएँ 1300 से अधिक परीक्षा केन्द्रों पर परीक्षाओं में शामिल होते हैं। इससे यह संस्था राज्य की सबसे बड़ी शिक्षा की परीक्षा व्यवस्था के रूप में बन चुकी है। उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा परिषद् का इतिहास कई चरणों में विकसित हुआ है। प्रारंभिक चरण 1996–1999 9 फरवरी 1996 को उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद् के तहत रामनगर नैनीताल में एक क्षेत्रीय कार्यालय की स्थापना की गई, जो उत्तराखण्ड क्षेत्र के लिए परीक्षा संचालन का कार्य देखता था। 1999 में इसी कार्यालय द्वारा पहली बार गढ़वाल और कुमाऊँ मंडल के लिए परीक्षाओं का संचालन किया गया। उत्तराखण्ड गठन के बाद बदलाव 2001–2002 राज्य गठन के बाद 22 सितंबर 2001 को उत्तरांचल शिक्षा एवं परीक्षा परिषद् की स्थापना की गई। इसके बाद 2002 में पहली बार परीक्षाओं का स्वतंत्र रूप से आयोजन किया गया। यह कदम राज्य की शिक्षा व्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया हैं। विधिक गठन और नाम परिवर्तन (2006–2008) 22 अप्रैल 2006 को उत्तरांचल विधान सभा द्वारा उत्तरांचल विद्यालयी शिक्षा अधिनियम, 2006 स्वीकार किया गया, जिसके बाद परिषद् का पुनर्गठन हुआ। इसके बाद 11 दिसंबर 2008 को इसे वर्तमान नाम उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा परिषद् प्रदान किया गया। वर्तमान कार्यप्रणाली और भूमिका आज यह परिषद् राज्य भर में शिक्षा व्यवस्था में महत्व यह संस्था न केवल परीक्षा संचालन तक सीमित है, बल्कि राज्य के लाखों छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और व्यापक नेटवर्क के कारण यह उत्तराखण्ड की शिक्षा व्यवस्था की आधारशिला बन चुकी है। लगभग तीन दशकों के विकास क्रम में उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा परिषद् ने राज्य की शिक्षा प्रणाली को संगठित और मजबूत बनाने में अहम योगदान दिया है। आज यह संस्था लाखों विद्यार्थियों के भविष्य का आधार बनकर उत्तराखण्ड की शैक्षणिक पहचान को मजबूत कर रही है।
माध्यमिक शिक्षा का पाठ्यक्रम तैयार करती है
हाई स्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं का संचालन करती है
परीक्षा परिणामों का मूल्यांकन और प्रकाशन करती है
शिक्षा गुणवत्ता सुधार के लिए नीतिगत सुझाव देती है
