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मध्य प्रदेश: अंबेडकर जयंती रैली में हुआ बवाल, लोगों ने की न्याय की मांग

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मध्य प्रदेश  Published by: Fulchand Malviya , मध्य प्रदेश  Edited By: Kunal, Date: 24/06/2026 03:40:52 pm Share:
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  • Published by.: Fulchand Malviya ,
  • Edited By.: Kunal,
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  • 24/06/2026 03:40:52 pm
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: अमिलिया थाना जिला सिंधी मध्य प्रदेश डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती रैली के दौरान पुलिसिया बदतमीजी और जानलेवा हमले का शिकार हुई।

विस्तार

मध्य प्रदेश: अमिलिया थाना जिला सिंधी मध्य प्रदेश डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती रैली के दौरान पुलिसिया बदतमीजी और जानलेवा हमले का शिकार हुई। पीड़ित महिला पानकली साकेत के मामले में एक बेहद चौंकाने वाला और संदेहास्पद मोड़ सामने आया है, जिस महिला को न्याय दिलाने के लिए मिशन महाराजा बलि सेना के प्रमुख राहुल नवरंग लगातार लड़ाई लड़ रहे हैं, मध्य प्रदेश पुलिस ने अपनी समाधान रिपोर्ट में उल्टा उसी पीड़ित महिला को मुख्य आरोपी के रूप में दर्ज कर दिया है। इस प्रशासनिक हेरफेर पर तीखी आपत्ति जताते हुए मिशन महाराजा बलि सेना प्रमुख राहुल नवरंग ने मध्य प्रदेश पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली की धज्जियां उड़ा दी हैं। उन्होंने दोटूक कहा है कि पानकली साकेत का इस पूरे विवाद में कोई आपराधिक मामला ही नहीं था। 

उन्हें इस पूरे प्रकरण में बेवजह घसीटकर अपराधी बनाया जा रहा है ताकि पुलिस अपनी बदतमीजी और कमियों को छिपा सके। भीम आर्मी से नहीं है कोई संबंध, फिर भी बलि का बकरा बनीं पानकली साकेत मामले की जमीनी हकीकत उजागर करते हुए मिशन महाराजा बलि सेना प्रमुख राहुल नवरंग ने बताया कि 14 अप्रैल को पुलिसकर्मियों के साथ जिस विवाद या मारपीट की बात कही जा रही है। उसमें शामिल लोग भीम आर्मी के सदस्य थे इस पूरे घटनाक्रम में पीड़ित महिला पानकली साकेत का दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। सबसे बड़ी बात यह है कि पानकली साकेत भीम आर्मी की सदस्य तक नहीं हैं इसके बावजूद, मध्य प्रदेश पुलिस ने अपनी नाकामी और खीझ मिटाने के लिए एक ऐसी निर्दोष महिला को मुख्य आरोपी बना दिया, जिसका उस संगठन या विवाद से कोई वास्ता ही नहीं था। महिला को मारकर किया लहूलुहान, वीडियो होने के बाद भी आखिर क्यों नहीं कराई मेडिकल जांच। 

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे संदेहास्पद और गैर-कानूनी पहलू यह है कि घटना के दौरान जेंट्स पुलिस वालों ने पीड़ित महिला के ऊपर इस कदर बर्बरता की कि उनका सर फोड़ दिया और वे पूरी तरह लहूलुहान हो गई थीं। इस खौफनाक मंजर का पूरा वीडियो भी मौजूद है, जिसमें पुलिस की बर्बरता साफ दिखाई दे रही है। कानून के अनुसार, किसी भी मारपीट या सर फटने जैसी गंभीर चोट के मामले में पुलिस की यह पहली जिम्मेदारी होती है कि वह पीड़ित की तुरंत मेडिकल जांच एमएलसी यानी मेडिको लीगल केस करवाए ताकि चोटों की गंभीरता का सरकारी रिकॉर्ड दर्ज हो सके, लेकिन अमलिया पुलिस ने जानबूझकर पीड़ित महिला की मेडिकल जांच नहीं करवाई मिशन महाराजा बलि सेना प्रमुख राहुल नवरंग ने मध्य पुलिस की इस घोर लापरवाही पर सवाल दागते हुए कहा कि जब महिला लहूलुहान हो गई थी और उसका वीडियो भी मौजूद है, तो आखिर पुलिस प्रशासन ने उसकी मेडिकल जांच क्यों नहीं करवाई साफ है कि अगर मेडिकल जांच होती, तो पुलिस की इस जानलेवा बर्बरता के सारे सबूत सरकारी कागजों पर आ जाते, जिसे छिपाने के लिए ही इस जांच को पूरी तरह दबा दिया गया। 

कानून की धज्जियां उड़ी: पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिला पर बरसाईं लाठियां

इस मामले में सबसे शर्मनाक पहलू यह सामने आया है कि पीड़ित महिला के साथ थाने के बाहर पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा मारपीट की गई। मिशन महाराजा बलि सेना प्रमुख ने इस पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि कानूनन किसी भी महिला को हाथ लगाने, पकड़ने या उनके खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार केवल महिला पुलिसकर्मी को ही है। कोई भी पुरुष पुलिसकर्मी किसी महिला को छू तक नहीं सकता, लेकिन यहाँ मर्यादा और कानून दोनों को ताक पर रखकर जेंट्स पुलिस वालों ने 14 अप्रैल को महिला को थाने के बाहर खुलेआम मारा-पीटा, सर फोड़कर लहूलुहान कर दिया, जो कि मध्य प्रदेश पुलिस प्रशासन की गुंडागर्दी का जीता-जागता सबूत है।

20 शिकायतें करने के बाद भी सरकार मौन, पीड़ित महिला को किया जा रहा परेशान

मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस पुलिसिया बर्बरता और तानाशाही के खिलाफ मिशन महाराजा बलि सेना प्रमुख राहुल नवरंग अब तक अलग-अलग स्तरों पर कम से कम 20 शिकायतें दर्ज करा चुके हैं इतनी बड़ी संख्या में शिकायतें किए जाने और पुख्ता सबूत होने के बावजूद सरकार और उच्च अधिकारियों की तरफ से अब तक दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। न्याय देने के बजाय पूरा प्रशासनिक तंत्र मौन साधे बैठा है और उल्टा पीड़ित महिला को ही लगातार कानूनी दांव-पेचों में उलझाकर मानसिक और प्रशासनिक रूप से प्रताड़ित व परेशान किया जा रहा है। 

शिकायतकर्ता और मिशन महाराजा बलि सेना प्रमुख द्वारा गृह विभाग पुलिस विभाग में दर्ज कराई गई शिकायत के जवाब में पुलिस ने जो समाधान पत्र जारी किया है, उसने न्याय व्यवस्था पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राहुल नवरंग ने शिकायत दर्ज कराई थी कि रैली के दौरान पुलिसकर्मियों ने पानकली साकेत के साथ मारपीट और गाली-गलौज की थी, जिसकी थाने में प्राथमिकी एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही थी। इसके विपरीत पुलिस ने अपने आधिकारिक जवाब में दावा किया है कि पानकली साकेत खुद इस मामले में आरोपी हैं और उन्होंने 14 अप्रैल को थाने में आकर विवाद किया था, जिसके तहत उन पर अपराध क्रमांक 173/26 दर्ज किया गया है। 

पीड़ित को अपराधी बनाना प्रशासनिक तानाशाही राहुल नवरंग

रैली की तारीख 14 अप्रैल का हवाला देते हुए मिशन महाराजा बलि सेना प्रमुख राहुल नवरंग ने पुलिस प्रशासन के इस दावे को पूरी तरह से खारिज और बेबुनियाद बताया है। उनका साफ कहना है कि जब एक दलित महिला अपने साथ हुई मारपीट और बदतमीजी की शिकायत करने जाती है, तो मध्य प्रदेश पुलिस अपनी गलती मानने या दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने के बजाय, पीड़ित पक्ष पर ही झूठे मुकदमे लाद देती है। पानकली साकेत को इस मामले में बेवजह फंसाया जा रहा है, जो कि सीधे तौर पर मानवाधिकारों का हनन और प्रशासनिक तानाशाही है। पुलिस की थ्योरी पर उठ रहे गंभीर सवाल अमिलिया पुलिस ने इस मामले में कुल 34 लोगों को आरोपी बनाक।