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बिहार: सनातन संस्कृति की नींव हैं रामचरितमानस और रामायण

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बिहार  Published by: Sanjay Kumar Verma , बिहार  Edited By: Kunal, Date: 24/06/2026 03:07:35 pm Share:
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  • Published by.: Sanjay Kumar Verma ,
  • Edited By.: Kunal,
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  • 24/06/2026 03:07:35 pm
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संक्षेप

बिहार: कौआकोल में प्रखंड के सोखोदेवरा गांव स्थित सूर्य मंदिर परिसर में आयोजित श्री श्री 108 श्री सूर्य नारायण प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ के चौथे दिन श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा।

विस्तार

बिहार: कौआकोल में प्रखंड के सोखोदेवरा गांव स्थित सूर्य मंदिर परिसर में आयोजित श्री श्री 108 श्री सूर्य नारायण प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ के चौथे दिन श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा। यज्ञ मंडप में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए, वहीं शाम के समय आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। प्रवचन के दौरान आचार्य श्याम दास जी महाराज ने कहा कि प्रत्येक सनातनी परिवार के घर में दो महान ग्रंथ रामचरितमानस और रामायण अवश्य रहने चाहिए। 

उन्होंने कहा कि ये ग्रंथ केवल धार्मिक पुस्तकें नहीं,बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाले आदर्श ग्रंथ हैं। इनके अध्ययन से व्यक्ति के भीतर संस्कार, मर्यादा,सत्य और धर्म के प्रति आस्था मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को सनातन संस्कृति से जोड़ने के लिए घर-घर में धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन जरूरी है। भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाकर ही समाज में प्रेम,भाईचारा और नैतिकता कायम रह सकती है।प्रवचन के दौरान श्रद्धालु भक्तिभाव में डूबे नजर आए और पूरा यज्ञ स्थल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। आयोजन समिति द्वारा यज्ञ को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई जा रही है।