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राजस्थान: शाहपुरा नगर पालिका चुनाव में चौखट-चौखट दस्तक, निर्दलीयों ने बिगाड़े भाजपा-कांग्रेस के समीकरण
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संक्षेप
राजस्थान: शाहपुरा के भीलवाड़ा जिले की शाहपुरा नगर पालिका के चुनाव में सियासी घमासान अब अपने चरम पर पहुंच गया है।
विस्तार
राजस्थान: शाहपुरा के भीलवाड़ा जिले की शाहपुरा नगर पालिका के चुनाव में सियासी घमासान अब अपने चरम पर पहुंच गया है। चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में प्रत्याशियों ने पूरी ताकत झोंक दी है। सुबह से देर शाम तक शहर की गलियों में जनसंपर्क, बैठकों और मतदाताओं की चौखट पर दस्तक का दौर जारी है। भाजपा और कांग्रेस जहां अपने-अपने मुद्दों और दावों के साथ मतदाताओं को साधने में जुटी हैं, वहीं निर्दलीय प्रत्याशियों की सक्रियता ने दोनों प्रमुख दलों के चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर दिया है। शाहपुरा नगर पालिका के सभी 35 वार्डों में चुनावी गतिविधियां तेज हैं। भाजपा ने विकास कार्यों को अपना प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया है। विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया। धरती देवरा से पैदल संपर्क अभियान के दौरान उन्होंने मतदाताओं से संवाद करते हुए भाजपा का बोर्ड बनने पर बिजली, पानी, सड़क और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता देने का भरोसा दिलाया। भाजपा प्रत्याशी अपने जनसंपर्क अभियान में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं तथा स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से रख रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से वार्ड स्तर पर बैठकों और घर-घर संपर्क के माध्यम से मतदाताओं को अपने पक्ष में करने का प्रयास किया जा रहा है। दूसरी ओर कांग्रेस ने भाजपा के विकास के दावों पर सवाल उठाते हुए पिछले पांच वर्षों के पालिका कार्यकाल को चुनावी मुद्दा बनाया है। नगर अध्यक्ष रमेश सेन के नेतृत्व में कांग्रेस प्रत्याशी घर-घर पहुंच रहे हैं। कांग्रेस की ओर से बिजली, पानी, सफाई और सड़क जैसी स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए मतदाताओं से बदलाव के लिए समर्थन मांगा जा रहा है। जिला बहाली का मुद्दा भी चुनाव में चर्चा के केंद्र में है। शाहपुरा जिला बचाओ संघर्ष समिति ने सात वार्डों में अपने प्रत्याशी उतारकर चुनावी मैदान में तीसरा मोर्चा खड़ा कर दिया है। समिति ने शाहपुरा जिला बहाली को अपना प्रमुख मुद्दा बनाया है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने भी मतदाताओं से जिला बहाली के पक्ष में समिति के प्रत्याशियों को समर्थन देने की अपील की है। समिति अध्यक्ष दुर्गालाल राजोरा ने वार्ड संख्या 20 में घर-घर जनसंपर्क कर मतदाताओं से संवाद किया। वहीं वार्ड संख्या 11 में निर्दलीय प्रत्याशी और पूर्व भाजपा पार्षद योगेश पारीक की सक्रियता भी चुनावी चर्चा का विषय बनी हुई है। कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी प्रमुख दलों के अधिकृत उम्मीदवारों के वोट बैंक में सेंध लगाने की स्थिति में नजर आ रहे हैं। ऐसे में शाहपुरा नगर पालिका चुनाव अब केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला नहीं रह गया है। विकास, पिछले पांच वर्षों का हिसाब, जिला बहाली और निर्दलीय प्रत्याशियों की चुनौती जैसे मुद्दों ने चुनाव को बहुकोणीय बना दिया है। अंतिम दौर के प्रचार में प्रत्याशियों का पूरा जोर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने पर है। अब चुनाव परिणाम ही तय करेंगे कि शाहपुरा की जनता विकास, बदलाव, जिला बहाली या निर्दलीय विकल्प में से किस मुद्दे को अपनी प्राथमिकता देती है।
