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उत्तर प्रदेश: 20 साल से आवास योजना के लाभ का इंतजार, कच्चे मकान में रहने को मजबूर परिवार
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: पीलीभीत बीसलपुर तहसील क्षेत्र के बरखेड़ा कला गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिलने का मामला सामने आया है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: पीलीभीत बीसलपुर तहसील क्षेत्र के बरखेड़ा कला गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिलने का मामला सामने आया है। गांव निवासी ज्ञान स्वरूप का कहना है कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से आवास योजना के लाभ की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन अब तक उन्हें पक्का मकान बनाने के लिए सरकारी सहायता नहीं मिल सकी है। उनका परिवार वर्तमान में कच्चे मकान में रहने को मजबूर है। ज्ञान स्वरूप के अनुसार, उनके परिवार में पांच बच्चे हैं, जिनमें चार बेटियां और एक बेटा है। दो बेटियों की शादी हो चुकी है। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के कारण वह अपने स्तर पर पक्का मकान बनवाने में सक्षम नहीं हैं। बारिश के मौसम में कच्चे मकान में रहने के दौरान उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि मकान में लगी लोहे की चादरें भी काफी पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं। बारिश के दौरान पानी टपकने और आसपास जलभराव होने से परिवार को परेशानी होती है। स्थिति यह है कि घर में पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण रिश्तेदारों और मेहमानों के आने पर भी बैठने की उचित व्यवस्था नहीं हो पाती। पीड़ित परिवार का कहना है कि आवास योजना के संबंध में उन्होंने 1076 हेल्पलाइन पर शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद अब तक मामले की प्रभावी जांच नहीं हुई और उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान और संबंधित सचिव पर पात्र लोगों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं देने का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन गांव में पात्र परिवारों का निष्पक्ष सर्वे कराए और नियमानुसार जिन लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलना चाहिए, उन्हें योजना से जोड़ा जाए। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी से मामले का संज्ञान लेते हुए जांच कराने तथा पात्र परिवारों को आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचना चाहिए, ताकि कच्चे और जर्जर मकानों में रहने वाले परिवारों को राहत मिल सके।
