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उत्तर प्रदेश: मजदूर संगठनों का हल्ला बोल, ज्ञापन सौंपकर उठाईं कई मांगें

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उत्तर प्रदेश  Published by: Ramkesh Vishwakarma , उत्तर प्रदेश  Edited By: Kunal, Date: 16/05/2026 10:22:36 am Share:
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  • Published by.: Ramkesh Vishwakarma ,
  • Edited By.: Kunal,
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  • 16/05/2026 10:22:36 am
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: जनपद गाजीपुर के सरजू पांडेय पार्क में शुक्रवार को अखिल भारतीय खेत-ग्रामीण मजदूर सभा सहित विभिन्न मजदूर संगठनों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल के समर्थन में धरना-प्रदर्शन किया।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: जनपद गाजीपुर के सरजू पांडेय पार्क में शुक्रवार को अखिल भारतीय खेत-ग्रामीण मजदूर सभा सहित विभिन्न मजदूर संगठनों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल के समर्थन में धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया। इस आंदोलन को संयुक्त किसान मोर्चा, ट्रेड यूनियन और कर्मचारी संगठनों का भी समर्थन मिला। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने 'विकसित भारत ग्रामीण आजीविका मिशन वीबी ग्रामजी कानून लागू कर मनरेगा को खत्म कर दिया है, जिससे ग्रामीण गरीबों की रोजगार गारंटी प्रभावित हुई है। उन्होंने मनरेगा को फिर से बहाल करने, न्यूनतम 200 दिन के रोजगार और 700 रुपये दैनिक मजदूरी की गारंटीज्ञापन में 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाली चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने और पुराने श्रम कानूनों को बहाल करने की मांग भी शामिल थी। संगठनों ने अकुशल, कुशल और अति कुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम मासिक वेतन 34 हजार से 44 हजार रुपये तय करने की अपील की।

प्रदर्शनकारियों ने नोएडा और गाजियाबाद में मजदूरों के आंदोलन पर हुई कार्रवाई का विरोध करते हुए गिरफ्तार श्रमिकों की बिना शर्त रिहाई की मांग की। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण को रोकने, स्मार्ट मीटर योजना को समाप्त करने और दिल्ली, पंजाब व कर्नाटक की तरह 300 यूनिट मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई।संगठनों ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक धरना-प्रदर्शनों को रोकने के लिए नेताओं को नजरबंद किया जा रहा है, जिससे भय का माहौल बन रहा है। ज्ञापन में रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल और कृषि उर्वरकों की संभावित मूल्य वृद्धि का विरोध करते हुए बढ़े हुए गैस के दाम वापस लेने की मांग की गई। इसके साथ ही, माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के कर्ज और उत्पीड़न से परेशान महिलाओं तथा गरीब परिवारों को राहत देने, कर्ज माफी करने और सरकारी बैंकों से आसान व सस्ता ऋण उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।