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गुजरात: सफाई नहीं होने पर सड़क पर उतरे स्थानीय लोग, सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल
- Photo by : SOCIAL MEDIA
संक्षेप
गुजरात: लिंबायत ज़ोन क्षेत्र में भारी बारिश और मीठी खाड़ी में आई बाढ़ के कारण बैठी कॉलोनी और स्लम बोट-बी इलाके में पानी भर गया था।
विस्तार
गुजरात: लिंबायत ज़ोन क्षेत्र में भारी बारिश और मीठी खाड़ी में आई बाढ़ के कारण बैठी कॉलोनी और स्लम बोट-बी इलाके में पानी भर गया था। पानी उतरने के बाद भी पूरे इलाके में कीचड़, गंदगी और अस्वच्छता का साम्राज्य कायम है। ड्रेनेज, नालियां और मैनहोल गंदगी से भरे पड़े हैं, ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव नहीं किया गया है और संक्रामक बीमारियां फैलने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सबसे गंभीर बात यह है कि लिंबायत ज़ोन कार्यालय से मात्र पाँच मिनट की दूरी पर स्थित इस इलाके की ऐसी बदहाल स्थिति होने के बावजूद अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। लोग अपनी शिकायत लेकर ज़ोन कार्यालय पहुंचे, लेकिन संबंधित अधिकारी बाहर आकर उनकी बात सुनने तक के लिए तैयार नहीं हुए। लोगों ने इसे जनता के प्रति लापरवाही और जिम्मेदारी से भागने का रवैया बताया। अल्पसंख्यक नेता नूरुभाई चाइनीज़, रईसा शेख, अस्मा मंसूरी, फरजाना और दक्षा समेत स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि जब बड़े व्यापारियों की समस्याओं की बात आती है तो सरकार और अधिकारी तुरंत पहुंच जाते हैं, लेकिन गरीब और स्लम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की समस्याएं सुनने का भी उनके पास समय नहीं है। स्थानीय लोगों ने बताया कि राज्य के गृह मंत्री हर्ष संघवी बड़े व्यापारियों से मुलाकात कर रहे हैं और सहायता की घोषणाएं कर रहे हैं, लेकिन स्लम क्षेत्रों में अब तक उचित सर्वे भी नहीं किया गया है। प्रभावित परिवारों से मिलने या उनकी स्थिति जानने के लिए भी कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा है। अधिकारियों की उदासीनता से परेशान होकर स्थानीय लोग आखिरकार गांधीवादी तरीके से धरने पर बैठ गए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी जायज़ मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया और तुरंत सफाई, डिसइन्फेक्शन, ड्रेनेज की सफाई तथा स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक कार्य शुरू नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में वे और अधिक व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की होगी।स्थानीय लोगों ने कड़ा सवाल उठाया कि यदि ज़ोन कार्यालय से केवल पाँच मिनट की दूरी पर स्थित बस्ती की यह दयनीय स्थिति है, तो शहर के दूर-दराज़ इलाकों में प्रशासन की विफलता का आसानी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
