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राजस्थान: जयपुर की सड़कों पर उतरी मोबाइल कोर्ट, थार समेत 7 वाहन सीज; ओवरलोड बस पर लगा जुर्माना

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राजस्थान:  Published by: Randheer Singh , राजस्थान:  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 16/07/2026 12:47:35 pm Share:
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  • Edited By.: Kunal Tewatia,
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  • 16/07/2026 12:47:35 pm
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संक्षेप

राजस्थान: जयपुर की सड़कों पर अब ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों की खैर नहीं है। यातायात नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई के लिए मोबाइल कोर्ट सड़क पर उतर गई है।

विस्तार

राजस्थान: जयपुर की सड़कों पर अब ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों की खैर नहीं है। यातायात नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई के लिए मोबाइल कोर्ट सड़क पर उतर गई है। यह चलती-फिरती अदालत मौके पर ही मामलों की सुनवाई कर चालान काट रही है और गंभीर लापरवाही मिलने पर वाहन जब्त किए जा रहे हैं। जयपुर-दिल्ली हाईवे के सड़वा मोड़ पर मोबाइल कोर्ट ने विशेष जांच अभियान चलाकर 35 वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की। इनमें थार समेत 7 वाहनों को दस्तावेज पूरे नहीं होने पर जब्त कर लिया गया। मौके पर ही हुआ मामलों का निपटारा जयपुर मेट्रो-II के मोबाइल मजिस्ट्रेट एवं अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश विजय कुमार सिरोहीवाल के निर्देशन में यह अभियान चलाया गया। जांच के दौरान बाइक, कार, ट्रक, बस और टैक्सी समेत सभी प्रकार के वाहनों की जांच की गई। 35 वाहन चालक मोटर वाहन अधिनियम के तहत दोषी पाए गए। इनमें 11 वाहन चालकों ने मौके पर गलती स्वीकार की, जिसके बाद जुर्माना लगाकर मामलों का निपटारा कर दिया गया।

थार का इंश्योरेंस खत्म, फिर भी दौड़ रही थी सड़क पर जांच में एक थार ऐसी मिली, जिसका इंश्योरेंस काफी समय पहले समाप्त हो चुका था। चालक के पास जरूरी दस्तावेज भी नहीं थे। इसके अलावा एक बाइक भी वैध पंजीकरण के बिना चलती मिली। दोनों समेत कुल 7 वाहनों को धारा 207 के तहत सीज कर दिया गया। ओवरलोड बस पर 4 हजार का जुर्माना मोबाइल कोर्ट ने ओवरलोड बसों पर भी कार्रवाई की। जांच के दौरान एक निजी बस में क्षमता से अधिक यात्री भरे मिले। यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ मानते हुए बस चालक और ऑपरेटर पर मौके पर ही 4 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।
क्या है मोबाइल कोर्ट मोबाइल कोर्ट एक विशेष न्यायिक व्यवस्था है, जिसमें मजिस्ट्रेट, अभियोजन अधिकारी और न्यायिक कर्मचारी वाहन में ही मौजूद रहते हैं। नियम तोड़ने वाले मामलों की मौके पर सुनवाई कर तुरंत फैसला किया जाता है। गंभीर मामलों में वाहन सीज करने और अन्य कानूनी कार्रवाई का अधिकार भी होता है। अधिकारियों ने साफ किया है कि बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट, बिना इंश्योरेंस, ओवरस्पीडिंग और शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह कार्रवाई जारी रहेगी।


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