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गुजरात: भक्ति, आस्था और भाईचारे के संग निकली भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा
- Photo by : SOCIAL MEDIA
संक्षेप
गुजरात: अहमदाबाद में भगवान श्री जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा इस वर्ष भी पूरे धार्मिक उत्साह, भव्यता और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच निकाली गई।
विस्तार
गुजरात: अहमदाबाद में भगवान श्री जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा इस वर्ष भी पूरे धार्मिक उत्साह, भव्यता और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच निकाली गई। सुबह से ही लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के दर्शन के लिए उमड़ पड़े। पूरे मार्ग पर "जय जगन्नाथ" के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा कर भगवान के रथ का स्वागत किया और सुख-समृद्धि की कामना की।पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार रथयात्रा की शुरुआत जमालपुर स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर से हुई। इसके बाद रथ निर्धारित मार्ग से होते हुए कालूपुर पहुंचा और फिर सरसपुर की ओर अग्रसर हुआ। धार्मिक मान्यता के अनुसार सरसपुर को भगवान श्रीकृष्ण का "मामा का घर" माना जाता है, जहां भगवान विश्राम करते हैं। इस परंपरा का पालन हर वर्ष श्रद्धा और आस्था के साथ किया जाता है। रथयात्रा के दौरान विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों द्वारा जगह-जगह स्वागत मंच लगाए गए। श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, शरबत, फल और प्रसाद की व्यवस्था की गई। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक झांकियों ने लोगों का मन मोह लिया। हाथी, घोड़े, अखाड़ों के कलाकार और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों ने पूरे आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया। इस पावन अवसर पर केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि गुजरात के विभिन्न जिलों और देश के कई राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने भी भाग लिया। सबसे खास बात यह रही कि विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोगों ने मिलकर रथयात्रा का स्वागत किया। गुजराती, हिंदीभाषी, मराठी, मारवाड़ी तथा मुस्लिम समाज के लोगों ने आपसी भाईचारे और सौहार्द का संदेश देते हुए भगवान जगन्नाथ के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। यह दृश्य सामाजिक एकता और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बनकर सामने आया। रथयात्रा के पूरे मार्ग पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासन की टीमों ने लगातार निगरानी रखी, जिससे यात्रा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ से देश में सुख, शांति, समृद्धि और सभी समाजों के बीच प्रेम और सद्भाव बनाए रखने की प्रार्थना की। भगवान जगन्नाथ की यह पावन रथयात्रा एक बार फिर धार्मिक आस्था, भारतीय संस्कृति और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक बनकर सामने आई। लाखों भक्तों ने भगवान के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया और पूरे उत्साह के साथ जयघोष किया बोलो जगन्नाथ महाराज की जय।
