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मध्य प्रदेश: 36 साल पुराने स्थाई वारंट का तामील, ₹10,000 का इनामी आरोपी इंदौर से हुआ गिरफ्तार

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मध्य प्रदेश  Published by: Riyaz Mohammad Khan , मध्य प्रदेश  Edited By: Kunal, Date: 11/06/2026 06:26:26 pm Share:
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  • Published by.: Riyaz Mohammad Khan ,
  • Edited By.: Kunal,
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  • 11/06/2026 06:26:26 pm
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: झाबुआ जिले की थांदला पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने करीब 36 वर्षों से फरार चल रहे स्थाई वारंट के एक आरोपी को इंदौर से गिरफ्तार किया है।

विस्तार

मध्य प्रदेश: झाबुआ जिले की थांदला पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने करीब 36 वर्षों से फरार चल रहे स्थाई वारंट के एक आरोपी को इंदौर से गिरफ्तार किया है। आरोपी लंबे समय से अपनी पहचान छुपाकर रह रहा था और पुलिस को लगातार चकमा दे रहा था। जानकारी के अनुसार, यह मामला 11 जून 1991 का है, जब फरियादी कश्मेंर पिता इलियास भाबर (जाति भील, निवासी रंगपुरा) ने थाना थांदला में पशु चोरी की शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में अपराध क्रमांक 138/1991 धारा 379 आईपीसी के तहत केस दर्ज किया गया था। जांच के दौरान आरोपी बदीया उर्फ बद्री पिता मांगलिया पारगी, निवासी तादलादरा (थाना मेघनगर) का नाम सामने आया था। मामले में आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस द्वारा लंबे समय तक प्रयास किए गए, लेकिन वह लगातार फरार रहा। इस पर जिला पुलिस झाबुआ द्वारा आरोपी पर ₹10,000 का इनाम घोषित किया गया था। आरोपी पिछले 36 वर्षों से गिरफ्तारी से बचता रहा और इस दौरान उसने अपना ठिकाना बदलकर इंदौर के हातोद क्षेत्र स्थित भील कॉलोनी में नया जीवन शुरू कर लिया था। बताया जा रहा है कि उसने अपनी पहचान छुपाने के लिए नाम भी बदल लिया था।

पुलिस को साइबर सेल की मदद से आरोपी के इंदौर में होने की सूचना मिली, जिसके बाद थांदला पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए घेराबंदी कर उसे हिरासत में ले लिया। चूंकि मामला अत्यंत पुराना था, इसलिए पुलिस ने आरोपी की पहचान और सत्यापन की पूरी प्रक्रिया सावधानीपूर्वक की। सभी आवश्यक जांच और पुष्टि के बाद आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर लिया गया और न्यायालय में पेश किया जा रहा है। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी अशोक कनेश, उप निरीक्षक संतोष गुप्ता, सहायक उप निरीक्षक शैलेंद्र शुक्ला, प्रधान आरक्षक रायसिंह एवं राजेंद्र सहित आरक्षक राहुल जमरा, जितेश डावर और अनिल परमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस की इस सफलता को लंबे समय से लंबित मामलों के निष्पादन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।