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मध्य प्रदेश: रक्षाबंधन से पहले पोरसा के बाजारों में बढ़ी रौनक, राखियों की खरीदारी को उमड़ी भीड़

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मध्य प्रदेश  Published by: Ajay Singh Tomar , मध्य प्रदेश  Edited By: Yashoda, Date: 21/08/2026 04:26:25 pm Share:
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  • Published by.: Ajay Singh Tomar ,
  • Edited By.: Yashoda,
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  • 21/08/2026 04:26:25 pm
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: पोरसा भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन नजदीक आते ही पोरसा शहर के बाजारों में त्योहार की रौनक दिखाई देने लगी है।

विस्तार

मध्य प्रदेश: पोरसा भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन नजदीक आते ही पोरसा शहर के बाजारों में त्योहार की रौनक दिखाई देने लगी है। शुक्रवार को शहर के बाजार में राखियों की खरीदारी के लिए महिलाओं और बहनों की अच्छी-खासी भीड़ नजर आई। राखी की दुकानों पर तरह-तरह की आकर्षक राखियां सजी हुई हैं और दुकानदार भी ग्राहकों के आने से उत्साहित दिखाई दे रहे हैं। रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि यह भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, विश्वास, जिम्मेदारी और अपनत्व को मजबूत करने वाला भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण त्योहार है। बहन अपने भाई की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना करते हुए राखी बांधती है, वहीं भाई भी बहन की रक्षा और हर सुख-दुख में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प लेता है।

पहले एक महीने पहले से दिखती थी रौनक

बुजुर्गों और पुराने दुकानदारों का कहना है कि कुछ वर्ष पहले रक्षाबंधन की तैयारियां काफी पहले शुरू हो जाती थीं। त्योहार से कई सप्ताह पहले ही बहन-बेटियां अपने मायके पहुंचने लगती थीं। घरों में उत्सव जैसा माहौल रहता था। बहनों के आने से मायके में भी अलग ही रौनक होती थी और भाई-बहन पूरे परिवार के साथ मिलकर त्योहार मनाते थे।
समय के साथ जीवनशैली और तकनीक में बड़ा बदलाव आया है। मोबाइल फोन और सोशल मीडिया ने लोगों की दूरी कम जरूर की है, लेकिन कई बार रिश्तों में मिलने-जुलने की परंपरा भी प्रभावित हुई है। आज कई बहन-बेटियां मायके आने के बजाय मोबाइल फोन पर ही बातचीत और वीडियो कॉल के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़ी रहती हैं। अब पहले की तरह कई दिन पहले मायके आने की परंपरा कम होती दिखाई दे रही है और अनेक परिवारों में बहनें रक्षाबंधन के दिन ही  या एक दो दिन पहले ही मायके पहुंचती हैं।

बाजार में बढ़ी खरीदारी

रक्षाबंधन को लेकर बाजार में राखियों की कई वैरायटी उपलब्ध हैं। बच्चों से लेकर महिलाओं तक की पसंद को ध्यान में रखते हुए रंग-बिरंगी और आकर्षक राखियां दुकानों पर सजाई गई हैं। बहनें अपने भाइयों की पसंद के अनुसार राखियां पसंद कर रही हैं और दुकानों पर खरीदारी का सिलसिला धीरे-धीरे बढ़ रहा है। दुकानदारों को उम्मीद है कि रक्षाबंधन का पर्व नजदीक आने के साथ बाजार में खरीदारी और बढ़ेगी। राखियों के साथ मिठाई, पूजा सामग्री और उपहारों की दुकानों पर भी ग्राहकों की संख्या बढ़ने की संभावना है।

रिश्तों को जोड़ने का संदेश देता है रक्षाबंधन

आज के बदलते दौर में रक्षाबंधन का महत्व और भी बढ़ जाता है। व्यस्त जीवन, दूरियां और मोबाइल की दुनिया के बीच यह पर्व परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे के करीब आने का अवसर देता है। राखी का धागा केवल कलाई पर नहीं बंधता, बल्कि यह भाई-बहन के बीच भावनात्मक जुड़ाव और बचपन की यादों को भी मजबूत करता है। पोरसा के बाजार में दिखाई देने लगी रक्षाबंधन की यह रौनक इस बात का संकेत है कि आधुनिकता के दौर में भी भाई-बहन के प्रेम की परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत है। जरूरत सिर्फ इतनी है कि मोबाइल और बदलती जीवनशैली के बीच रिश्तों के लिए समय निकाला जाए और त्योहारों को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि परिवार के साथ प्रेम और अपनत्व बांटने के अवसर के रूप में मनाया जाए। रक्षाबंधन का संदेश यही है—रिश्तों की डोर मजबूत रहे, भाई-बहन का प्रेम बना रहे और परिवार की खुशियां हमेशा कायम रहें।