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मध्य प्रदेश: Sihora में धार्मिक स्थल के बाहर विवाद के बाद पथराव, घटना पर बोले Mehul Srivastava कड़े फैसले लेने वाला मुख्यमंत्री चाहिए
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: जबलपुर जिले के सिहोरा तहसील के आजाद चौक इलाके में गुरुवार देर रात एक धार्मिक स्थल के बाहर विवाद की चिंगारी ऐसे भड़क गई, जिसने पूरे इलाके में तनाव और सांप्रदायिक उभार पैदा कर दिया।
विस्तार
मध्य प्रदेश: जबलपुर जिले के सिहोरा तहसील के आजाद चौक इलाके में गुरुवार देर रात एक धार्मिक स्थल के बाहर विवाद की चिंगारी ऐसे भड़क गई, जिसने पूरे इलाके में तनाव और सांप्रदायिक उभार पैदा कर दिया। यह घटना धर्म, आस्था और सामाजिक सद्भाव के नाम पर उस समय उभरकर सामने आई, जब दुर्गा मंदिर में आरती और पास ही मौजूद मस्जिद में नमाज़ का समय लगभग एक साथ आ गया। स्थानीय सूचना और पुलिस सूत्रों के मुताबिक करीब रात 9 बजे, मंदिर में चल रही आरती के दौरान विवाद शुरू हुआ और देखते ही देखते पूरा मामला पथराव तक पहुंच गया। प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, एक युवक ने दुर्गा मंदिर की ग्रिल को वँडलाइज़ (तोड़ा-फोड़ किया), जिससे माहौल अत्यंत तनावपूर्ण हो गया। कुछ लोगों का दावा है कि लाउडस्पीकर से आरती और नमाज़ के समय की आवाज़ को लेकर आपसी असहमति के कारण बहस शुरू हुई थी। इस बात को लेकर दोनों पक्षों में तीखी नोक-झोंक बढ़ी और फिर *कुछ व्यक्तियों ने पत्थरबाज़ी भी शुरू कर दी। श्रीवास्तव ने मांग की कि पीड़ित पक्ष को त्वरित न्याय दिलाने हेतु फास्ट-ट्रैक कोर्ट की स्थापना की जाए, सभी आरोपियों की निष्पक्ष एवं शीघ्र जांच कराई जाए, तथा साथ ही प्रशासन को समुदायों के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए योजनाबद्ध संवेदनशीलता कार्यक्रम चलाने चाहिए। उनका यह भी कहना है कि अन्याय या उपद्रव के लिए किसी भी प्रकार की सामाजिक या राजनीतिक बहस को बढ़ाना बेहद खतरनाक है और इससे केवल जनता की सुरक्षा तथा सामाजिक सौहार्द्य प्रभावित होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता वर्तमान में स्थिति को पूरी तरह शांतिपूर्ण बनाये रखना तथा भ्रामक अफवाहों से जनता को बचाते हुए आपसी समझ तथा सम्मान की भावना को बढ़ावा देना होना चाहिए। यह घटना न केवल सिहोरा या जबलपुर की चिंता है, बल्कि यह पूरे राज्य के लिए कानून-व्यवस्था, धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण सवाल बन चुकी है — एक ऐसा सवाल जिसका जवाब जनता अब ठोस और निर्भीक निर्णयों के रूप में चाहती है। प्रशासन और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है कि वह इस मुद्दे को हल करने में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरतें तथा जनमानस में विश्वास पुनः स्थापित करें।
घटना फैलते ही मौके पर भारी भीड़ इकट्ठी हो गई और विवाद जल्द ही तनाव और हिंसा में बदल गया। दोनों पक्षों से जमकर पत्थरबाज़ी दर्ज की गई, तथा स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अब तक करीब 20 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दोषियों की पहचान की जा रही है। हालांकि वरिष्ठ अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया कि किसी धार्मिक स्थल को कोई गंभीर नुकसान नहीं पहुंचा है और किसी भी व्यक्ति की जान का नुकसान नहीं हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम पर सामाजिक कार्यकर्ता मेहुल श्रीवास्तव ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह घटना न सिर्फ निंदनीय है, बल्कि इससे यह भी स्पष्ट होता है कि प्रदेश को ऐसे मुख्यमंत्री की सख्त आवश्यकता है, जो कानून-व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव को बनाये रखने में हर हाल में निर्णायक भूमिका निभा सके। श्रीवास्तव ने कहा कि “जब तक अपराधियों और असामाजिक तत्वों के मन में कानून का भय नहीं होगा, तब तक इस प्रकार की घटनाएँ बार-बार होती रहेंगी।” उन्होंने जोर देकर कहा कि अपराध और सांप्रदायिक हिंसा के विरुद्ध शून्य सहनशीलता नीति अपनाई जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति न पैदा हो।
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