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मध्य प्रदेश:  पोरसा में बना अनोखा ‘पितृवन’: आस्था, पर्यावरण और संस्कृति का अद्भुत संगम

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मध्य प्रदेश  Published by: Ajay Singh Tomar , Date: 28/03/2026 03:14:47 pm Share:
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  • 28/03/2026 03:14:47 pm
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संक्षेप

मध्य प्रदेश:  स्वास्तिक, “माँ”, “जय महाकाल” और “मेरो मुक्तिधाम” जैसी धार्मिक आकृतियाँ हरियाली के बीच जीवंत दिखाई देती हैं। यह दृश्य न केवल मनमोहक है, बल्कि आध्यात्मिक शांति भी प्रदान करता है। चारों दिशाओं में मोरपंखी, चमेली, मधुका

विस्तार

मध्य प्रदेश:  स्वास्तिक, “माँ”, “जय महाकाल” और “मेरो मुक्तिधाम” जैसी धार्मिक आकृतियाँ हरियाली के बीच जीवंत दिखाई देती हैं। यह दृश्य न केवल मनमोहक है, बल्कि आध्यात्मिक शांति भी प्रदान करता है। चारों दिशाओं में मोरपंखी, चमेली, मधुकामिनी, कोलियस, करौंदा, छुईमुई, मोगरा, ग्वारपाठा, मालती बेल, चांदनी और अपराजिता बेल जैसे अनेक औषधीय एवं सुगंधित पौधों का रोपण किया गया है, जिससे पूरा क्षेत्र महकता रहता है। पितरों की स्मृति और आशीर्वाद का केंद्र पितृवन का मुख्य उद्देश्य अपने पूर्वजों (पितरों) की स्मृति को संजोना और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करना है। मान्यता है कि यहां आकर पितरों को याद करने और प्रार्थना करने से उन्हें शांति मिलती है तथा उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है, पर्यटन और समाज सेवा का नया केंद्र इस अनोखे स्थल की सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पोरसा पहुंच रहे हैं। यह स्थान धीरे-धीरे धार्मिक पर्यटन का आकर्षण बनता जा रहा है।

जनभागीदारी से सशक्त पहल कार्यक्रम के दौरान सरपंच रामसहाय जी, महंत दोजीराम राठौर, कल्याण सिंह तोमर (फौजी) सहित कई समाजसेवी उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना की और इसके संरक्षण व देखरेख की जिम्मेदारी कर रहे लोगों को धन्यवाद ज्ञापित किया पोरसा का “पितृवन” केवल एक बगीचा नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और प्रकृति का अद्भुत संगम है। यह पहल समाज को अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और सामूहिक प्रयास की शक्ति का संदेश देती है।