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Mumbai News: डीपफेक और फर्जी विज्ञापनों के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचीं श्रुति हासन

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महाराष्ट्र  Published by: Kunal Tewatia , महाराष्ट्र  Edited By: Shikha Pandey, Date: 03/08/2026 06:06:23 pm Share:
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  • Published by.: Kunal Tewatia ,
  • Edited By.: Shikha Pandey,
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  • 03/08/2026 06:06:23 pm
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संक्षेप

महाराष्ट्र: अभिनेत्री श्रुति हासन ने अपने नाम, छवि और आवाज़ का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किए जाने के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया है।

विस्तार

महाराष्ट्र: अभिनेत्री श्रुति हासन ने अपने नाम, छवि और आवाज़ का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किए जाने के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि उनकी अनुमति के बिना डीपफेक तकनीक, AI से तैयार किए गए वीडियो और फर्जी विज्ञापनों के जरिए उनका चेहरा और पहचान इस्तेमाल की जा रही है। उनका कहना है कि इस तरह का कंटेंट न केवल उनकी छवि को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि लोगों को भी भ्रमित कर रहा है। याचिका में श्रुति हासन ने अदालत से अनुरोध किया है कि ऐसे सभी फर्जी वीडियो, विज्ञापन और AI-जनित कंटेंट को विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से हटाने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही उन्होंने मांग की है कि भविष्य में उनकी पहचान का अनधिकृत उपयोग रोकने के लिए संबंधित पक्षों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।

श्रुति हासन का कहना है कि आधुनिक AI तकनीक और डीपफेक टूल्स का दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिससे किसी भी व्यक्ति की तस्वीर, आवाज़ या वीडियो को वास्तविक जैसा दिखाकर गलत जानकारी फैलाना आसान हो गया है। ऐसे फर्जी विज्ञापन लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ संबंधित व्यक्ति की प्रतिष्ठा पर भी असर डाल सकते हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब AI और डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग को लेकर देशभर में चिंता बढ़ रही है। कई फिल्मी हस्तियां और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग पहले भी इस तरह के मामलों पर चिंता जता चुके हैं। अब श्रुति हासन की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद यह स्पष्ट होगा कि इस तरह के मामलों में डिजिटल प्लेटफॉर्म और अन्य संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी किस तरह तय की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इसके दुरुपयोग पर प्रभावी कानूनी नियंत्रण और सख्त नियमों की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है। श्रुति हासन का यह कदम डिजिटल सुरक्षा, निजता और व्यक्तित्व अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर नई बहस को भी जन्म दे सकता है।