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उत्तर प्रदेश: एक्सीडेंट के बाद इलाज में लापरवाही का आरोप, पत्रकार ने डॉक्टर के खिलाफ दी तहरीर
 

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उत्तर प्रदेश  Published by: sanavvr , उत्तर प्रदेश  Edited By: Namita Chauhan, Date: 16/05/2026 02:05:16 pm Share:
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  • Edited By.: Namita Chauhan,
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  • 16/05/2026 02:05:16 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: देवबंद देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह दैनिक भास्कर डिजिटल में कार्यरत देवबंद के पत्रकार आबाद अली का विगत 27 अप्रैल की शाम हाईवे पर एक्सीडेंट हो गया था,जिसमें पत्रकार को कहीं गंभीर चोटेंआई थी और उन्हें नगर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: देवबंद देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह दैनिक भास्कर डिजिटल में कार्यरत देवबंद के पत्रकार आबाद अली का विगत 27 अप्रैल की शाम हाईवे पर एक्सीडेंट हो गया था,जिसमें पत्रकार को कहीं गंभीर चोटेंआई थी और उन्हें नगर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल के डॉक्टर व संचालक पर पत्रकार ने इलाज में घोर लापरवाही नाजायज तरीके से धन उगाही करने का आरोप लगाते हुए कोतवाली में तहरीर दी है जिस पर जांच जारी है। दुर्घटना हुई चलिए यह भाग्य की बात है, जो होना था वह हुआ लेकिन इसके बाद रेलवे रोड स्थित एक पुराने विशेषज्ञ डॉक्टर ने इलाज के दौरान जिस तरह का निंदनीय रवैया अख्तियार किया वह नहीं होना चाहिए था। घायल पत्रकार को जब अस्पताल पहुंचाया गया तो वह काफी समय तक बेंच पर पड़े इलाज के लिए तड़पते रहे लेकिन डॉक्टर पहले पैसे जमा करने के इंतजार में लगे रहे आखिरकार कुछ इंतजार के बाद परिजन व साथी आ गए पैसे जमा हुए इलाज भी शुरू हो गया। डॉक्टर साहब ने के इलाज की सुनिए जब दुर्घटना हुई तो पत्रकार का ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ था। इन्होंने बिना सुन किया ही टांके लगा दिए हड्डियां मोड तोड़कर सेट करने की कोशिश की जो नहीं हुई बहुत भारी भरकम प्लास्टर चढ़ा दिए पसली टूटी होने की वजह से घायल पत्रकार को सांस लेना मुश्किल हो गया। दुर्घटना के बाद जो खून हाथों पर लगा था। उसे साफ करना भी सही न समझा उसके ऊपर ही कॉटन लगाकर कच्चा प्लास्टर बांध दिया गया एक बेल्ट दी गई जो  छोटी थी मगर जैसे तैसे उसे भी चेस्ट से बांध दिया गया और इस इलाज के नाम पर अच्छी खासी रकम डॉक्टर साहब द्वारा ले ली गई इच्छा के विरुद्ध मरीज की छुट्टी उसी दिन कर दी गई, जब मरीज घर आया तो सबसे पहले तो सांस में घुटन होने लगी क्योंकि बेल्ट छोटी थी इसी कारण बीपी कंट्रोल नहीं हो रहा था दोनों हाथों में फ्रैक्चर जख्म और पसली टूटी होने के कारण मरीज का एक एक मिनट सपनों से भी परे दर्द के बीच साथ गुजर रहा था।


छुट्टी देते समय डॉक्टर साहब ने मरीज के साथियों और बच्चों को बताया गया की कोई गंभीर बात नहीं लेकिन जब 2 दिन बाद चेकअप के लिए मरीज को डॉक्टर के पास ले जाया गया तो डॉक्टर साहब ने मरीज के दो बेटों से कहा कि तुम्हारे पिता का ऑपरेशन जरूरी है।  लगभग 90000 रुपए खर्च होंगे यहां तक कहां की ऑपरेशन होने के बाद भी आजीवन अपाहिज हो सकते हैं डॉक्टर साहब कि इस बात से घायल पत्रकार के परिवार में दहशत फैल गई रोना धोना मच गया इसके बाद घायल पत्रकार को दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां आज तक उनका उपचार जारी है और ऑपरेशन, जैसी बात सामने नहीं आई अब सवाल यह उठता है कि इस तरह से इमोशनल ब्लैक मेल करना क्या एक वरिष्ठ चिकित्सक के लिए उचित है यदि उचित है तो फिर सिस्टम को इसी तरह चलने देना चाहिए और यदि यह तरीका गलत है तो इसका जमकर विरोध किया जाना चाहिए घायल पत्रकार द्वारा कोतवाली में तहरीर दे दी गई है जिस पर पुलिस की जांच शुरू हो चुकी है आगे  न्याय के लिए संघर्ष जारी रहेगा।