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उत्तर प्रदेश: गाजीपुर में 600 साल पुराने मठ के जीर्णोद्धार के निर्देश, BDO ने किया निरीक्षण

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उत्तर प्रदेश  Published by: Ramkesh Vishwakarma , उत्तर प्रदेश  Edited By: Kunal, Date: 08/04/2026 11:10:50 am Share:
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  • Edited By.: Kunal,
  • Date:
  • 08/04/2026 11:10:50 am
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: जनपद गाज़ीपुर के तपोभूमि करंडा क्षेत्र का अतिप्राचीन एवं धार्मिक सिद्ध स्थल महादेव राधेश्वरनाथ ठाकुर लक्ष्मी नारायण मठ मंदिर कसुम्हींकला पर आज खंड विकास अधिकारी करंडा सुवेदिता सिंह

विस्तार

उत्तर प्रदेश: जनपद गाज़ीपुर के तपोभूमि करंडा क्षेत्र का अतिप्राचीन एवं धार्मिक सिद्ध स्थल महादेव राधेश्वरनाथ ठाकुर लक्ष्मी नारायण मठ मंदिर कसुम्हींकला पर आज खंड विकास अधिकारी करंडा सुवेदिता सिंह अपने दल बल के साथ पहुंची|वह इस स्थल पर पहुंचकर पूजा-अर्चना के बाद रुद्राभिषेक किया। इसके बाद वहां के महंत स्वामी बबलू गिरी जी ने उन्हें अंगवस्त्रम तथा माल्यार्पण कर स्वागत किया। उनके साथ राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों तथा ग्राम सभा के मुखिया भी थे। बताते चले कि उक्त सिद्ध स्थल करीब 600 साल पुराना है जिसमें राधे गिरी,जालिम गिरी,ओदार गिरी, हरिनाम गिरी,बद्री नारायण गिरी तथा वर्तमान में बबलू गिरी जी महाराज इस सिद्ध स्थल के पीठाधीश्वर हैं। बबलू गिरी जी के पिताजी बद्रीनारायण गिरी जी जो पूर्व पीठाधीश्वर थे| वे  कुसुम्हींकला तथा मदनहीं दोनों मठों के महंत थे|इस इस मठ के पास 292 बीघा जमीन रही है,जिसमें पोखरा, तालाब तथा बड़े-बड़े प्लांट रहे हैं। महंत जी के सीधापन क की वजह से अगल-बगल के किसानों द्वारा कब्जा कर लिया गया है। 

इस सिद्ध राधेश्वरनाथ मठ पहुंचने के बाद खंड विकास अधिकारी सूवेदिता सिंह ने इसकी जर्जर स्थिति पर अपनी संवेदना व्यक्त की तथा वहां के ग्राम प्रधान रामकिशुन बिन्द उनके बेटे उपेंद्र बिन्द तथा संजय यादव ग्राम विकास अधिकारी को बुलाकर इसको सुविधा देने तथा मरम्मत के लिए आदेशित किया। उन्होंने तत्काल प्रभाव से मठ की मरम्मत एवं जीर्णोद्धार पर अपनी संवेदना व्यक्त की और कहा कि मेरे द्वारा जो भी बन सकेगा मैं सहयोग करूंगी। बताते चलें कि इतने सिद्ध स्थल  ठाकुर लक्ष्मी नारायण मठ मंदिर पर धर्मशाला,संत निवास, शौचालय,जल,सड़क तथा प्रवेश द्वार जैसी मौलिक सुविधाएं नहीं है|इस संबंध में पीठाधीश्वर बबलू गिरी जी महाराज ने बताया कि ग्राम प्रधान तथा ग्राम पंचायत सचिव की अपेक्षा के कारण इस सिद्ध स्थल का विकास नहीं हुआ और दैनिक स्थिति में पड़ा हुआ है| यहां पर जो भी आता है। उसकी मनौती महादेव की कृपा से पूरी होती है