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उत्तर प्रदेश: 'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर बड़ा ऐलान, 2029 से एक साथ होंगे देशभर में चुनाव

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उत्तर प्रदे  Published by: Anand Kumar (UP) , उत्तर प्रदे  Edited By: Yashoda, Date: 15/07/2026 03:50:02 pm Share:
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  • Published by.: Anand Kumar (UP) ,
  • Edited By.: Yashoda,
  • Date:
  • 15/07/2026 03:50:02 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: एक देश- एक चुनावी संबंधी विधायकों पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष और भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने कहा कि देश में वर्ष 2029 में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होंगे। देश में बार-बार चुनाव लोकतंत्र के खिलाफ है।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: एक देश- एक चुनावी संबंधी विधायकों पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष और भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने कहा कि देश में वर्ष 2029 में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होंगे। देश में बार-बार चुनाव लोकतंत्र के खिलाफ है। सिविल सोसाइटी (नागरिक) लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के पक्ष मे हैं। पीपी चौधरी के अगुवाई मे जेपीसी तीन दिवसीय दौरे पर सोमवार को लखनऊ पर पहुंची थी। जेपीसी अध्यक्ष ने एक होटल में प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि हम देश में जहां भी जा रहे हैं, आम जनता एक देश एक चुनाव का समर्थन कर रही है लोकतंत्र की असली हितधारक जनता ही है। उन्होंने कहा कि 1952 से 1967 तक चार बार एक साथ चुनाव हुए थे. तब तो हमारे पास आज जैसा इंफ्रास्ट्रक्चर भी नहीं था। आज हमारे पास पर्याप्त ईवीएम भी है। चौधरी ने कहा कि लोकतंत्र की मूल भावना है कि चुनाव में अधिक से अधिक लोग वोट डालें, जो तभी संभव है जब, चुनाव बार-बार न हो। तभी लोकतंत्र अपने सही मायनों में लागू होगा। विपक्ष का रहा है कि एक चुनाव की अवधारणा संघीय ढांचे के खिलाफ है? जवाब में जेपीसी अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव के समय- सारणी एक होने से संघीय ढांचे की भावना का उल्लंघन नहीं होता। 50 और 60 के दशक में एक साथ हुए यह साबित करते हैं।

 

इसी तरह से एक साथ चुनाव कराने के लिए पर्याप्त संसाधन न होने की विपक्ष की बात भी गलत है। आज भारत इंफ्रास्ट्रक्चर में बहुत आगे पहुंच चुका है। जेपीसी अध्यक्ष ने कहा कि विपक्षी पार्टियों एक देश- एक चुनाव का सिर्फ इसलिए विरोध कर रही हैं की कहीं इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न मिल जाए। पीपी चौधरी ने कहा कि इस कानून को लागू करने की हमारी पूरी तैयारी है। यह पूछे जाने पर की यूपी सरीखे जिन राज्यों में विधानसभा का कार्यकाल बचा होगा। वहां विरोध हो सकता है, उनका जवाब था कि जिन राज्यों में भाजपा की सरकारें होंगी, वहां की सरकारें स्वयं ही विधानसभा भंग कर लोकसभा के साथ चुनाव कराने का प्रस्ताव अपने-अपने राज्यपालों को दे सकती हैं। हम इसके लिए आवश्यक सूचना भी ला सकते हैं।

 

उन्होंने कहा कि संयुक्त संसदीय समिति ने अनेक बैठकें की हैं और विभिन्न राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों, चुनाव आयोग, विधि विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से सुझाव प्राप्त किए हैं. समिति का प्रयास है कि सभी पक्षों की राय सुनकर व्यापक सहमति के आधार पर अपनी सिफारिशें तैयार की जाएं। पीपी चौधरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल चुनावों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि लोकतंत्र को अधिक प्रभावी,पारदर्शी और उत्तरदायी बनाना है। सभी सुधार संविधान की भावना के अनुरूप और व्यापक राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर किए जाने चाहिए।