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उत्तर प्रदेश: सेमरियावां में निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी सेंटरों की होगी जांच, सीएमओ ने सीएचसी अधीक्षक को बनाया नोडल अधिकारी
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: संतकबीरनगर सेमरियावां ब्लॉक क्षेत्र में संचालित निजी अस्पतालों, नर्सिंगहोम, क्लीनिक, पॉलीक्लीनिक, पैथोलॉजी लैब और डायग्नोस्टिक सेंटरों की जांच की जाएगी।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: संतकबीरनगर सेमरियावां ब्लॉक क्षेत्र में संचालित निजी अस्पतालों, नर्सिंगहोम, क्लीनिक, पॉलीक्लीनिक, पैथोलॉजी लैब और डायग्नोस्टिक सेंटरों की जांच की जाएगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने इसके लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सेमरियावां के अधीक्षक डॉ. सुरेश चंद्रा को नोडल अधिकारी नामित किया है। जांच के दौरान संस्थानों के पंजीकरण, नवीनीकरण और निर्धारित मानकों के अनुपालन की पड़ताल की जाएगी। अल्ट्रासाउंड सेंटर इस जांच के दायरे में शामिल नहीं होंगे। क्षेत्र में निजी चिकित्सा संस्थानों के संचालन को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं। कुछ स्थानों पर मेडिकल स्टोर के साथ सीमित जगह में नर्सिंगहोम जैसी सुविधाएं संचालित किए जाने के आरोप हैं। ऐसे में संस्थानों के पंजीकरण, चिकित्सकों की उपलब्धता, स्वास्थ्यकर्मियों की योग्यता और आवश्यक सुविधाओं की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सीएमओ की ओर से सौंपी गई जिम्मेदारी के तहत नोडल अधिकारी क्षेत्र में संचालित निजी चिकित्सा संस्थानों की जांच करेंगे। इस दौरान यह देखा जाएगा कि संबंधित संस्थान नियमानुसार पंजीकृत हैं या नहीं, पंजीकरण का नवीनीकरण कराया गया है या नहीं और स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन के लिए निर्धारित मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं। संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं और आवश्यक व्यवस्थाओं की भी पड़ताल की जाएगी। सेमरियावां क्षेत्र के गांवों, कस्बों और प्रमुख चौराहों के आसपास निजी चिकित्सा संस्थानों के संचालन को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें आती रही हैं। कुछ संचालकों पर मेडिकल स्टोर के पीछे सीमित कमरों में नर्सिंगहोम जैसी सुविधाएं चलाने और पर्याप्त योग्य चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के बिना मरीजों का इलाज करने के आरोप लगाए जाते रहे हैं। वहीं, कुछ पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक सेंटरों पर जांच संबंधी जानकारी तथा तकनीकी कर्मचारियों का विवरण स्पष्ट रूप से प्रदर्शित नहीं करने और मनमाना शुल्क वसूलने की शिकायतें भी सामने आई हैं। हालांकि, इन शिकायतों की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। जांच पूरी होने के बाद नोडल अधिकारी रिपोर्ट सीएमओ को सौंपेंगे। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। इस जांच से क्षेत्र में संचालित निजी चिकित्सा संस्थानों की वास्तविक स्थिति सामने आने और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। सीएचसी सेमरियावां के अधीक्षक डॉ. सुरेश चंद्रा ने बताया कि सीएमओ ने उन्हें ब्लॉक क्षेत्र के निजी चिकित्सालयों, नर्सिंगहोम, क्लीनिक, पॉलीक्लीनिक, पैथोलॉजी लैब और डायग्नोस्टिक सेंटरों की जांच के लिए नोडल अधिकारी नामित किया है। संस्थानों के पंजीकरण, नवीनीकरण और निर्धारित मानकों के अनुपालन की जांच कर रिपोर्ट सीएमओ को सौंपी जाएगी।
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