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उत्तर प्रदेश: 60 और 90 दिन से लंबित विवेचनाओं पर एसपी सख्त, चार विवेचकों का वेतन रोका
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: लंबित विवेचनाओं के निस्तारण में लापरवाही पर पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को पुलिस लाइन सभागार में आयोजित अर्दली रूम में 60 और 90 दिन से लंबित विवेचनाओं
विस्तार
उत्तर प्रदेश: लंबित विवेचनाओं के निस्तारण में लापरवाही पर पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को पुलिस लाइन सभागार में आयोजित अर्दली रूम में 60 और 90 दिन से लंबित विवेचनाओं की प्रकरणवार समीक्षा की गई। अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर चार विवेचकों का सितंबर माह का वेतन रोकने के आदेश दिए गए। वहीं चार अन्य विवेचकों के खिलाफ प्रारंभिक जांच के निर्देश दिए गए हैं। समीक्षा में कई मामलों में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर एसपी ने नाराजगी जताई। लापरवाही पाए जाने पर चार विवेचकों का सितंबर 2026 का वेतन रोकने का आदेश दिया। चार अन्य विवेचकों के खिलाफ प्रारंभिक जांच खोलने के निर्देश दिए गए। जांच अधिकारियों को विवेचना में हुई देरी और लापरवाही के कारणों की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया है एसपी ने कहा कि विवेचना में लापरवाही, शिथिलता या अनावश्यक देरी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रारंभिक जांच में लापरवाही की पुष्टि होने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
एसपी ने क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद प्रियम राजशेखर पाण्डेय और क्षेत्राधिकारी मेंहदावल सर्व दवन सिंह की मौजूदगी में लंबित विवेचनाओं की समीक्षा की। इस दौरान डकैती, लूट, छिनैती, नकबजनी, वाहन चोरी और अन्य चोरी से जुड़े मामलों की स्थिति जानी गई। संबंधित विवेचकों से अब तक की कार्रवाई, उपलब्ध साक्ष्य, आरोपियों की गिरफ्तारी और विवेचना लंबित रहने के कारणों की जानकारी ली गई।
उन्होंने विवेचकों को कालबाधित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने, साक्ष्यों का निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण करने और लंबित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रभावी प्रयास करने के निर्देश दिए। सभी क्षेत्राधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र के थानों में 60 और 90 दिन से लंबित विवेचनाओं की नियमित समीक्षा और मॉनिटरिंग करने को कहा गया। एसपी ने स्पष्ट किया कि लंबित विवेचनाओं का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि न्यायालय में प्रभावी अभियोजन के जरिए दोषियों को शीघ्र सजा दिलाई जा सके।
