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बिहार: विवादित भूमि की नीलामी पर कोर्ट ने इंडियन बैंक को शो-कॉज नोटिस जारी, Sale Certificate पर रोक की मांग

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बिहार  Published by: Sajid Hossain , Date: 24/01/2026 02:19:41 pm Share:
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  • 24/01/2026 02:19:41 pm
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संक्षेप

बिहार: नवादा में विवादित भूमि पर Sale Certificate रोकने की मांग, इंडियन बैंक को कोर्ट का शो-कॉज नोटिस। नवादा (बिहार) नवादा ज़िले के नरहट थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम शेखपुरा स्थित खाता संख्या 119, प्लॉट संख्या 446

विस्तार

बिहार: नवादा में विवादित भूमि पर Sale Certificate रोकने की मांग, इंडियन बैंक को कोर्ट का शो-कॉज नोटिस। नवादा (बिहार) नवादा ज़िले के नरहट थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम शेखपुरा स्थित खाता संख्या 119, प्लॉट संख्या 446 की भूमि को लेकर गंभीर कानूनी विवाद सामने आया है। इस भूमि पर इंडियन बैंक द्वारा की गई ई-नीलामी के विरुद्ध सिविल कोर्ट, नवादा में मामला विचाराधीन है। वाद में याचिकाकर्ता अनवर हुसैन (पिता स्व. अब्दुल अज़ीज़) ने अदालत के समक्ष यह स्पष्ट किया है कि उक्त भूमि पर पूर्व से ही स्वामित्व विवाद लंबित है तथा जिस आधार पर बंधक व नीलामी की प्रक्रिया अपनाई गई, वह कानूनन संदेहास्पद है। कोर्ट ने लिया संज्ञान, बैंक को शो-कॉज नोटिस। मामले की गंभीरता को देखते हुए सब-जज V, नवादा की अदालत ने इंडियन बैंक (नरहट शाखा) को Show Cause Notice जारी कर दिया है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि यह नोटिस कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा विधिवत भेजा जा चुका है, जिसकी रसीद याचिकाकर्ता के पास उपलब्ध है। Sale Certificate पर रोक की मांग।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में यह स्पष्ट रूप से प्रार्थना की गई है कि।
बैंक द्वारा Sale Certificate जारी न किया जाए, न ही भूमि का दख़ल-क़ब्ज़ा किसी नीलामी खरीदार को सौंपा जाए, जब तक कि न्यायालय अंतिम निर्णय न दे दे।
अदालत ने इस प्रार्थना को गंभीरता से लेते हुए अंतरिम निषेधाज्ञा (Injunction) पर सुनवाई हेतु 22 जनवरी की तिथि निर्धारित की है। कानूनी विशेषज्ञों की राय
कानून विशेषज्ञों के अनुसार, जब किसी मामले में कोर्ट द्वारा शो-कॉज नोटिस जारी हो जाता है और उसकी सेवा प्रमाणित हो जाती है, 

तो उस अवधि में किसी भी प्रकार का यथास्थिति बदलने वाला कदम न्यायिक अनुशासन के विरुद्ध माना जाता है। सामाजिक पृष्ठभूमि भी चर्चा में। गौरतलब है कि अनवर हुसैन गांव के उन सामाजिक कार्यकर्ताओं में रहे हैं जिन्होंने वर्षों से अराजकता, जातीय भेदभाव और शोषण के विरुद्ध आवाज़ उठाई। वे ग्राम स्तर पर गठित सामाजिक संगठनों से भी जुड़े रहे हैं, जिसके कारण यह मामला सामाजिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। अब सबकी निगाहें 22 जनवरी पर।
अब पूरे मामले में निगाहें 22 जनवरी को होने वाली अदालत की सुनवाई पर टिकी हैं।

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