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मध्य प्रदेश: गैर-जिम्मेदार तहसीलदार से जनता और प्रशासन दोनों को नुकसान : कमल पाटनी
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: तहसीलदार प्रशासन और जनता के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी होता है। उससे अपेक्षा की जाती है कि वह कानून का निष्पक्ष पालन करे, जनता की समस्याओं का समाधान करे और शासन के निर्देशों को ईमानदारी से लागू करे।
विस्तार
मध्य प्रदेश: तहसीलदार प्रशासन और जनता के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी होता है। उससे अपेक्षा की जाती है कि वह कानून का निष्पक्ष पालन करे, जनता की समस्याओं का समाधान करे और शासन के निर्देशों को ईमानदारी से लागू करे। लेकिन जब कोई तहसीलदार अपने दायित्वों के प्रति उदासीन हो जाता है, तब सबसे अधिक नुकसान जनता और प्रशासन दोनों को होता है। ऐसा अधिकारी न तो जनता के प्रति उत्तरदायी दिखाई देता है और न ही प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति वफादार। जनता की शिकायतें वर्षों तक लंबित रहती हैं, न्यायालयों और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों का समय पर पालन नहीं होता, अवैध कब्जे और अतिक्रमण बने रहते हैं तथा वैध अधिकारों की रक्षा के स्थान पर फाइलों को एक टेबल से दूसरी टेबल तक घुमाया जाता रहता है। परिणामस्वरूप जनता का प्रशासन पर विश्वास कम होता है। शासन की छवि धूमिल होती है। न्याय मिलने में अनावश्यक विलंब होता है। कानून का पालन करने वाले नागरिक स्वयं को उपेक्षित महसूस करते हैं। एक जिम्मेदार तहसीलदार की पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसके कार्यों से होती है। जो अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान, कानून के निष्पक्ष पालन और न्यायालयीन आदेशों के क्रियान्वयन को प्राथमिकता देता है, वही प्रशासन की गरिमा बढ़ाता है। जो अधिकारी न जनता के प्रति उत्तरदायी हो और न ही प्रशासनिक दायित्वों के प्रति सजग, वह केवल पद पर बैठा व्यक्ति हो सकता है, प्रभावी प्रशासक नहीं।
