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 मध्य प्रदेश: तेज हाई बीम लाइटें बन रहीं सड़क हादसों का खतरा, परिवहन विभाग की निष्क्रियता पर उठे सवाल

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मध्य प्रदेश  Published by: Arun Shrivastava , मध्य प्रदेश  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 05/11/2026 04:52:10 pm Share:
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  • Published by.: Arun Shrivastava ,
  • Edited By.: Kunal Tewatia,
  • Date:
  • 05/11/2026 04:52:10 pm
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: रातों-रात रफ्तार पकड़ते शहरों और हाईवे की सड़कों पर अब सफर करना अपनी जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। सड़कों पर दौड़ते दोपहिया और चारपहिया वाहनों की अनियंत्रित 'हाई बीम' (तेज) हेडलाइट्स रात के समय

विस्तार

मध्य प्रदेश: रातों-रात रफ्तार पकड़ते शहरों और हाईवे की सड़कों पर अब सफर करना अपनी जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। सड़कों पर दौड़ते दोपहिया और चारपहिया वाहनों की अनियंत्रित 'हाई बीम' (तेज) हेडलाइट्स रात के समय जानलेवा साबित हो रही हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि रात में गाड़ी चलाते समय 'डिपर' (लाइट धीमी करना) देने की बुनियादी सड़क शिष्टाचार और नियम को चालक पूरी तरह भूल चुके हैं, और इन सब पर लगाम कसने में परिवहन विभाग की उदासीनता स्थिति को और भी बदतर बना रही है। अंधाधुंध 'हाई बीम' और सफेद LED लाइटों का खौफ  सड़कों पर अब पारंपरिक पीली लाइटों की जगह बेहद तेज और चुभने वाली सफेद LED और HID (हाई-इंटेंसिटी डिस्चार्ज) लाइटों ने ले ली है। जब कोई वाहन 'हाई बीम' पर सामने से आता है, तो उसकी तेज रोशनी सीधे सामने वाले चालक की आंखों पर पड़ती है

डिपर न देने की प्रवृत्ति बनी सबसे बड़ी वजह  यातायात नियमों के मुताबिक, रात में सामने से कोई गाड़ी आने पर अपनी लाइट को 'लो बीम' (डिपर) पर करना अनिवार्य है ताकि सामने वाले को साफ दिखाई दे सके। हालांकि, आज के समय में अधिकांश फोर व्हीलर और टू व्हीलर चालक इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। टू-व्हीलर चालक: स्कूटर और बाइक्स में तेज LED दिए जाने के बाद चालक अक्सर बिना जरूरत के भी हाई बीम पर ही गाड़ी चलाते हैं। फोर-व्हीलर चालक: बड़ी गाड़ियों (SUV और सेडान) में लगाई गई आफ्टर-मार्केट मॉडिफाइड अतिरिक्त तेज लाइटें छोटे वाहन चालकों और पैदल चलने वालों के लिए काल बन रही हैं। परिवहन विभाग और प्रशासन की आंखें मूंदे नीतियां
इस गंभीर होती समस्या के बावजूद परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई न होना बड़े प्रशासनिक सवालों को जन्म दे रहा है।

 नियमों की अनदेखी मोटर व्हीकल एक्ट के तहत गाड़ियों में तय सीमा से अधिक क्षमता वाली या अवैध मॉडिफाइड लाइटें लगाना और हाई बीम का लगातार दुरुपयोग करना दंडनीय अपराध है, लेकिन सड़कों पर इसकी चेकिंग शायद ही कभी देखने को मिलती है।
जागरूकता अभियानों की कमी: परिवहन विभाग द्वारा न तो समय-समय पर नाइट विजन और डिपर के इस्तेमाल को लेकर कोई विशेष अभियान चलाया जाता है और न ही ऑटोमोबाइल एजेंसियों पर बिना मानक वाली एक्सेसरीज की बिक्री पर रोक लग रही है।
विभाग की इस सुस्ती के कारण वाहन चालकों के हौसले बुलंद हैं और वे खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। हादसों के आंकड़े और जमीनी हकीकत स्थानीय पुलिस और हाईवे पेट्रोलिंग के आंकड़ों पर नजर डालें तो रात में होने वाले 40 प्रतिशत से अधिक हादसों की अप्रत्यक्ष वजह तेज लाइट की वजह से आंखों के आगे अचानक छाया अंधेरा होता है। कई बार वाहन नियंत्रित न होने के कारण गाड़ियां सड़क किनारे खड़े ट्रकों, डिवाइडरों या पेड़ से टकरा जाती हैं, जिससे कई परिवार उजड़ रहे हैं।

लोगों का मानना है कि केवल चालान काटने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जब तक परिवहन विभाग अपनी कुंभकर्णी नींद से नहीं जागेगा और अवैध रूप से लगाई जा रही हाई-इंटेंसिटी लाइटों के खिलाफ सख्त अभियान नहीं चलाएगा, तब तक रास्तों पर मौत का यह खेल थमता नजर नहीं आएगा