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मध्य प्रदेश: इथेनॉल उद्योग का मानव अधिकार आयोग अध्यक्ष ने किया निरीक्षण, पानी की गुणवत्ता जांची

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मध्य प्रदेश  Published by: Govardhan , मध्य प्रदेश  Edited By: Shubhi Shikha Nayal, Date: 22/08/2026 05:36:46 pm Share:
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  • 22/08/2026 05:36:46 pm
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: आगर मालवा जिले में मध्य प्रदेश राज्य मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने आगर-सारंगपुर रोड स्थित जिरकान एडवांस्ड फ्यूल प्राइवेट लिमिटेड की इथेनॉल उद्योग इकाई का निरीक्षण किया।

विस्तार

मध्य प्रदेश: आगर मालवा जिले में मध्य प्रदेश राज्य मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने आगर-सारंगपुर रोड स्थित जिरकान एडवांस्ड फ्यूल प्राइवेट लिमिटेड की इथेनॉल उद्योग इकाई का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने उद्योग में पानी के उपयोग, उपचार और निकासी की व्यवस्थाओं की विस्तार से जानकारी ली। साथ ही उद्योग से निकलने वाले पानी के सैंपल की जांच और उसकी गुणवत्ता से संबंधित रिपोर्ट के बारे में भी अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की। निरीक्षण के दौरान मानव अधिकार आयोग के डीआईजी मुकेश कुमार श्रीवास्तव, कलेक्टर डॉ. शेर सिंह मीना, पुलिस अधीक्षक दिलीप सोनी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। आयोग अध्यक्ष ने उद्योग प्रबंधन और अधिकारियों से चर्चा करते हुए यह जानकारी ली कि औद्योगिक इकाई में प्रतिदिन कितनी मात्रा में पानी का उपयोग किया जाता है और उपयोग के बाद कितना पानी बाहर निकलता है। इसके अलावा पानी के उपचार के लिए लगाए गए सिस्टम और निकासी की व्यवस्था के बारे में भी जानकारी ली गई।

डॉ. सिंह ने अधिकारियों से उद्योग से संबंधित पानी के लिए पहले लिए गए सैंपल और उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर पानी की गुणवत्ता की स्थिति जानी। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि औद्योगिक गतिविधियों के कारण आम लोगों के स्वास्थ्य पर किसी भी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। जन स्वास्थ्य की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पानी के उपचार और निकासी व्यवस्था की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। दरअसल, कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई के दौरान कुंडला खुर्द गांव के ग्रामीणों ने इथेनॉल उद्योग से निकलने वाले पानी को लेकर अपनी समस्याएं मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष के सामने रखी थीं। ग्रामीणों ने उद्योग से निकलने वाले पानी से जुड़ी समस्याओं की ओर आयोग का ध्यान आकर्षित कराया था। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आयोग अध्यक्ष ने स्वयं उद्योग का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का जायजा लेने का निर्णय लिया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों से पानी की गुणवत्ता, उपचार प्रक्रिया और निकासी व्यवस्था से जुड़ी जानकारी लेने के बाद आयोग अध्यक्ष ने जन स्वास्थ्य और पर्यावरणीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। आयोग की इस कार्रवाई के बाद ग्रामीणों की शिकायत और उद्योग से संबंधित जल प्रबंधन व्यवस्था पर निगरानी बढ़ने की उम्मीद है।