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उत्तर प्रदेश: सावन के पहले दिन में 20 हज़ार से भी ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे मंदिर परिसर, गुंजी महादेव की जय-जय कार  

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उत्तर प्रदेश  Published by: Anand Kumar (UP) , उत्तर प्रदेश  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 03/08/2026 06:07:42 pm Share:
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  • Published by.: Anand Kumar (UP) ,
  • Edited By.: Kunal Tewatia,
  • Date:
  • 03/08/2026 06:07:42 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: हर-हर महादेव बम-बम भोले के जयघोष से सावन के पहले सोमवार पर सोनभद्र जनपद सहित आसपास के क्षेत्र के शिव मंदिर शिवमय हो उठा

विस्तार

उत्तर प्रदेश: हर-हर महादेव बम-बम भोले के जयघोष से सावन के पहले सोमवार पर सोनभद्र जनपद सहित आसपास के क्षेत्र के शिव मंदिर शिवमय हो उठा। भोलेनाथ की भक्ति में डूबे कांवड़ियों के कंधों पर सजी कांवड़ और श्रद्धालुओं के मन में उमड़ती आस्था, दोनों मिलकर इस सोमवार को अलौकिक बना दिया। बाबा भोलेनाथ के प्रति अगाध श्रद्धा ही है कि रविवार की देर रात से ही श्रद्धालुओं का शिवालियों की ओर पहुंचना शुरू हो गया और अंधेरे में बोल-बम के उद्घोष गूँजते रहे। जनपद के चोपन स्थित सोनेश्वर महादेव कैलाश मंदिर, ओबरा की डम डम गुफा, भूतेश्वर दरबार, अगोरी, रेणुकूट, शक्तिनगर, अनपरा, बभनी, बीजपुर, दुद्धी, विंढमगंज, कोन सहित अन्य शिव मंदिरों में भक्तों ने भारी संख्या में जलाभिषेक किया। गुप्त काशी नाम से प्रसिद्ध घोरावल के शिवद्वार धाम में सावन के पहले सोमवार पर करीब 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान उमामहेश्वर का जलाभिषेक किया। वहीं 5 हजार से अधिक कांवरियों का जत्था विभिन्न घाटों से पवित्र जल लेकर हरिद्वार धाम पहुंचे। 3 बजे भोर मे मंगला आरती के बाद मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इसके बाद देर शाम तक भगवान उमामहेश्वर के जलाभिषेक और दर्शन-पूजन का सिलसिला चलता रहा। सावन माह में शिवद्वार धाम में लगने वाले धार्मिक मेले में भी सोमवार को काफी चहल-पहल देखी गई। मंदिर परिसर के बाहर सैकड़ो छोटी-बड़ी दुकानों पर श्रद्धालुओं की भीड़ देर शाम तक जुटी रही। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। क्षेत्राधिकारी घोरावल राजेश कुमार राय के अनुसार, सीसीटीवी कैमरों, बम निरोधक दस्ता, पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती और डॉग स्क्वायड के साथ सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही। गुप्तकाशी से प्रसिद्ध मंदिर शिवद्वार धाम की सबसे बड़ी विशेषता शिवलिंग पर नहीं, बल्कि 11वीं शताब्दी की भगवान शिव और माता पार्वती की प्राचीन प्रतिमा पर जलाभिषेक किया जाता है। यह प्रतिमा अत्यंत प्राचीन है और भगवान शिव यहां पूरे परिवार के साथ विराजमान हैं