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उत्तर प्रदेश: RBI जल्द ला सकता है प्लास्टिक नोट, छपाई लागत घटेगी और बढ़ेगी नोटों की उम्र
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) एक बार फिर प्लास्टिक के नोट यानी पॉलीमर बैंक नोट लाने की पुरानी योजना को सक्रिय कर रहा है। पिछले कुछ सालों में नोटों की मांग बहुत तेजी से बढ़ी है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) एक बार फिर प्लास्टिक के नोट यानी पॉलीमर बैंक नोट लाने की पुरानी योजना को सक्रिय कर रहा है। पिछले कुछ सालों में नोटों की मांग बहुत तेजी से बढ़ी है। इसलिए आरबीआई अब कागज के नोटों के जगह प्लास्टिक के नोट छापने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। आरबीआई के पिछले दो बोर्ड मीटिंग में इस मुद्दे पर विचार से चर्चा हुई। बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्लास्टिक के नोटों के उत्पादन की लागत कम होने और उनकी ज्यादा उम्र के फायदे को देखते हुए यह फैसला लिया जा रहा है। जल्द ही आम लोगों के लिए प्लास्टिक नोटों का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की घोषणा की जा सकती है। रिपोर्ट में मामले से अवगत एक सूत्र के हवाले से बताया गया है कि प्लास्टिक नोट छापने की लागत कागज के नोटों से काफी कम है। साथ ही एटीएम मशीनें भी इस नोटों को आसानी से पहचान सकेंगी। वित्त वर्ष 2024- 25 में कागजी नोट छापने पर आरबीआई को 6372.8 करोड़ रुपए खर्च करने पड़े, जो पिछले साल से ज्यादा था। साथ ही गंदे और खराब हो चुके नोटों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। FY25 मे 23.8 अरब गंदे नोट नष्ट किए गए, जो पिछले साल से 12.3 फ़ीसदी ज़्यादा थे। ज्यादातर 500 रूपए और 100 रूपए के नोट खराब हो रहे हैं। अभी देश में कुल सरकुलेशन वाले नोटों की वैल्यू 42.86 लाख करोड़ रुपए पहुंच गई, जो पिछले साल से 11.5 फ़ीसदी ज़्यादा है। छोटे नोटों जैसे 10 रूपए और 20 रूपए की मांग ज्यादा है, लेकिन कुछ नोटों में इनकी हिस्सेदारी बहुत कम है। यह पहली बार नहीं है, जब रिजर्व बैंक प्लास्टिक के बैंक नोट लाने पर विचार कर रहा है। पहले भी वर्ष 2012 में UPA सरकार ने 5 शहरों में 10 रूपए के प्लास्टिक नोटों का ट्रायल करने का फैसला लिया था, लेकिन उस समय तकनीकी चुनौतियों के कारण योजना रद्द हो गई थी। अब सूत्र बता रहे हैं कि पिछले 10 साल में तकनीक काफी बेहतर हो गई है और एटीएम के साथ कोई समस्या नहीं रहेगी. दुनिया में पहले से ही 60 से ज्यादा देश प्लास्टिक के नोट इस्तेमाल कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया सबसे पहले वर्ष 1988 में प्लास्टिक के नोट लाया था. सिंगापुर, थाईलैंड,मलेशिया, कनाडा आदि देशों में भी यह व्यवस्था सफल रही है। आरबीआई का मानना है कि प्लास्टिक के नोट ज्यादा दिनों तक चलेंगे, कम गंदे होंगे और सरकार की छपाई की लागत भी घटेगी।
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